बुधवार, 27 अप्रैल 2011
हाबड़ा पुल तोरा देखैबो @प्रभात राय भट्ट
रविवार, 17 अप्रैल 2011
दहेज मुक्त मिथिला स्थानीय सौराठ विकास समिति
हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन!
आजुक मिटिंग निरंतरता में अछि आ आब मैथिलीके मिथिलाक चौरी सऽ निकलि दहेज मुक्त मिथिलाके एहि दलानपर अपने लोकनिक पुनः स्वागत अछि। हमरा लोकनि लगभग हर विन्दुपर चर्चा कयलहुँ आ बहुतो रास बातके निर्णय कयलहुँ। सौभाग्य हमरा लोकनिक जे एहि मिटिंगमें श्री कृपानन्द झा सर के अध्यक्षता भेटल। श्रेष्ठ संरक्षक लोकनिक सान्निध्य भेटल। मुद्दा पर आबी।
१. सौराठ सभा के पुनरुत्थान करब से निर्णय लेल।
२. दहेज मुक्त मिथिला स्थानीय सौराठ विकास समिति एवं अन्य संस्थासभ संग मिलिके सहकार्य करब से निर्णय लेल।
३. दहेज मुक्त मिथिलाके स्वतंत्र संगठन बनायब से निर्णय लेल।
४. दहेज मुक्त विवाह के प्रोत्साहन देब से निर्णय लेल।
५. संगठन विस्तारके क्रममें स्थानीय एवं बाहरी सदस्य सभ के जोड़ब से निर्णय भेल। स्थानीय जिम्मेवारी सऽ लऽ के विभिन्न जगहके जिम्मेवारी सदस्य लोकनि सहर्ष स्वीकार कयलाह, जेकर सूची अलग सऽ पेश कयल जायत।
६. सदस्यता शुल्क संरक्षक सदस्य - ५१०१/-, संस्थापक सदस्य - २१०१/-, आजीवन सदस्य ५०१/- एवं साधारण सदस्य १५१/- राखब से निर्णय लेल।
७. सौराठ उपरान्त दहेज मुक्त विवाह समग्र मिथिलावासी हेतु बिना कोनो जाति-पाँति के भेदभाव रखने केवल मैथिली भाषाभाषीके लेल भारत तथा नेपालके विभिन्न स्थानपर सभा-आयोजना करब से निर्णय लेल।
८. सदस्य सभ के-कोना सदस्यता ग्रहण करता से निर्णय लेल, जेकर अलगे लिस्ट बनाओल जायत, सदस्यता शुल्क तत्काल श्री प्रकाश चौधरीजी के खाता संख्या ११३०२५९४५०२ - खाताधारक: प्रकाश चन्द्र चौधरी, बैंक: स्टेट बैंक अफ ईण्डिया, रहिका शाखा में कैल जाय से निर्णय भेल।
९. संगठन विस्तारके क्रममें स्थानीय नागरिक सभके सदस्यता अभियान हेतु कार्यकर्ता परिचालन, प्रचार-प्रसार हेतु आवश्यक पहल एवं आगामी २२ मई के सौराठमें सौराठ विकास समिति संग मिटिंग से निर्णय भेल।
१०. सौराठके सफलता हेतु कार्यक्रम २०-२९ जून, २०११ धरि सदस्य सभके सक्रिय योगदान सऽ स्थानीय सौराठ विकास समिति संग सहकार्य करैत सभामें एक शिविर तथा मंच दहेज मुक्त मिथिलाके तरफ सऽ होयत से निर्णय भेल।
एकर अलावे अनेको विन्दुपर सभ आदरणीय सदस्य सभक विचार भेटल आ ताहि विचार के एक बेर फेर सऽ समेटैक लेल इ थ्रेड के निर्माण कयल गेल, आब अपने लोकनि अपन-अपन विचार आ मिटिंगके संस्मरणके नीचां कमेन्टके रूपमें पोस्ट करी से आग्रह करैत फोरम के खोलैत छी।
धन्यवाद! जय मैथिली! जय मिथिला!!
परवीन नारायण चौधरी
बुधवार, 6 अप्रैल 2011
देलौ हम पेटकुनिया@प्रभात राय भट्ट
मंगलवार, 5 अप्रैल 2011
दुल्हे पीयोलक जहर@प्रभात राय भट्ट
सोमवार, 4 अप्रैल 2011
मंगलवार, 29 मार्च 2011
अनमोल रचना@प्रभात राय भट्ट
शुक्रवार, 25 मार्च 2011
पेट किया जरैत@प्रभात राय भट्ट
प्रेम दीवाना@प्रभात राय भट्ट
बुधवार, 23 मार्च 2011
हमरा बिसैर गेलौं@प्रभात राय भट्ट
सोमवार, 21 मार्च 2011
नैन किया भईरगेल@प्रभात राय भट्ट
शनिवार, 19 मार्च 2011
HOLI @PRABHAT RAY BHATT
HOLI @PRABHAT RAY BHATT

जीवन और रंग के बिच अन्योन्याश्रित सम्बन्ध है,दोनों के भीतर एक दूसरेका अस्तित्व बिधमान रहता है,रंग जीवनको सरसरता प्रदान करता है और जीवन रंग को जीवंतता प्रदान करता है ! जन्म के साथ ही मनुष्य में रंग के प्रति उमंग और अनुराग पल्वित होने लगता है,इस सम्बन्ध को कायम रखने के बास्ते हम होली जैसे पर्व त्यौहार को सहृदय आलिंगन करते है,ताकि जीवन और रंग का समागम हो सके!इसे लोक भाषा में होरी कहते है जिसका अर्थ होता है ह का अर्थ आकाश र का अर्थ अग्नि वा तेज होता है ओ प्रणव और ई शक्ति का स्वरुप है !होरी का शाब्दिक अर्थ है सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड तेजपूर्ण होना !तो आइये हम लोग भी होरी खेलें:-
यी प्रेमक पाती में लिखरहल छि अपन अभिलाशाक बोली !!
अईबेर प्रभात भाईजी गाम अओता की नए पूछीरहल अछि फगुवा टोली !!
बौआ काका के दालान में बनिरहल अछि फगुवाक प्लान !!
चईल रहल छई चर्चा अहिके चाहे खेत होई या खलिहान !!
कनिया काकी कहै छथिन बौआ क देखला बहुते दिन भगेल !!
वित साल गाम आएल मुदा विना भेट केने चईल्गेल !!
अहाक संगी साथी सब एक मास पाहिले गाम आबिगेल्ल !!
पूवा पूरी सेहो खिलाएब ,घोईर घोईर पियाएब हम अहाक भंग !!
शुक्रवार, 18 मार्च 2011
मिथिला गर्भपुत्र@PRABHAT RAY BHATT
सोमवार, 14 मार्च 2011
आदर्श विवाह@प्रभात राय भट्ट
गुरुवार, 3 मार्च 2011
wo gujre huye jamana@prabhat ray bhatt
मुस्कान तेरी होठो पे रहता था,
मेरे लब्ज पे कुछ और आती नहीं,
सारे रिश्ते अंजना सी लगती है,
शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2011
गीत बालविबाह@प्रभात राय भट्ट
कुमारी धिया@प्रभात राय भट्ट
सुनु सुनु यौ मिथिलावासी आऔर मिथिलाक बाबु भैया !!संगी सखी सभक भेलई ब्याह, हमर होतई कहिया !!
तिस वरखक भेली हम, मुदा अखनो रहिगेली कुमारी धिया !!
हमरा लेल नए छाई संसार में, एक चुटकी सिंदुरक किया !!
रोज रोज हम सपना देखैत छि, डोली कहार ल्या क ऐलैथ पिया !!
आईख खुलैय सपना टूटईय, जोर जोर स: फटईय हमर हीया !!
गामे गाम हमर बाबा घुमैय,ल्याक हाथ में माथक पगरी !!
कतहु वर नए भेटैय,की विन पुरुख के छई यी मिथिला नगरी ?!!
बेट्टावाला केर चाहि पाँच दश लाख टाका आ गाड़ी सफारी !!
तिनचाईर लाख टाका ऊपरस:जौ चाहैछी जे ओझा करे नोकरी सरकारी !!
अन्न धन्न गहना गुरिया एतेक चाही जे भईरजाई हुनक भखारी !!
बेट्टीवाला दहेज़ में सबकुछ लुटा क अपने भजाईत अछि भिखारी !!
बाबा हमर खेत खलिहान बेच देलन आ बेच रहल छैथ अपन घरारी !!
अहि कहू यौ मिथिलावासी आऔर मिथिलाक बाबु भैया !!
कतय स:देथिन बाबा हमर दहेज़ में एतेक रुपैया !!
रचनाकार: प्रभात राय भट्ट
मिथिला माए@प्रभात राय भट्ट


अहो भाग्य अछि हमर जन्म लेलौ मिथिला माए के कोरा में !!
एहन निश्छल आ बत्सल प्रेम भेटत नए चाहुओरा mइ
प्रकृति केर सुन्दर उपहार ,संस्कृति केर बिराट संसार !!
मानबता केर सर्बोतम ब्याबहार मिथिलाक मुलभुतआधार !!
राम रहीम मंदिर मस्जिद दसहरा होई या ईद क रित !!
मिथिलावासी हिदू होई या मुस्लिम एक दोसर स:करैछैथ प्रीत !!
मिथिलाक पसु पंछी सेहो जनैत अछि प्रेमक परिभाषा !!
मधुरों स:मधुर अछि मिथिलाक मैथिलि भाषा !!
ज्ञान सरोबर एतिहासिक धरोहर अछि मिथिलाक संस्कृति !!
मन मग्न भजईत अछि देख क सुन्दर आ मनोरम प्रकृति !!
मिथिले में जन्म लेलैथ सीता केर रूप में माए भगवती !!
महाकवि विद्यापति केर चाकर बनला महादेव उमापति !!
वैदेही केर सुन्दरता पर मोहित भेलैथ भगवान राम !!
बसुधा केर हृदय बनल अछि हमर महान मिथिलाधाम !!
कहैछैथ शास्त्र पुराण विद्वान पंडित आऔर प्रोहित !!
मिथिलावासी क दर्शन स:मात्र भजाईत अछि !!
मनुख क सम्पूर्ण पाप तिरोहित !!
रचनाकार :-प्रभात राय भट्ट
मिथिलांचल@प्रभात राय भट्ट

गंगा तट स: हिमालय केर पट
कोसी स: गनडकी तक !!
यी सम्पूर्ण भूमि अछि मिथिलांचल !!
जतेय बहथी निर्मलगंगाजल !!
हम थिक मिथिलाभूमि केर संतान !!
मिथिलांचल अछि हमार आन वान शान !!
मिथिलाक संस्कृति अछि हमर स्वाभिमान !!
स्वर्ग स: सुन्दर अछि हमर मिथिलाधाम !!
वसुधा केर हृदय थिक यी जनकपुरधाम !!
जतेय जन्म लेलैथ माँ जानकी आऔर साधू संत कवीर !!
एतही परम्पद पैलैथ ऋषि मुनि संत महंथ आऔर फकीर !!
राजर्षि जनक छलैथ विदेह राज्यक महर्षि राजा !!
कवी कौशकी गंडक बाल्मिकी मंडन !!
भारती सुशीला कुमारिल भट्ट नागार्जुन !!
महाकवि बिध्यापतिसं: बिद्वान रहथि प्रजा !!
मिथिला रहथि न्यायिक आऔर मसंसा ज्ञानक प्रदाता !!
येताही ब्याह केलैथ चारो भाई मर्यादापुरुषोतम राम बिधाता !!
मिथिला अछि भारतवर्ष केर प्राकृतिकाल स: ज्ञानबिज्ञान क स्रोत !!
यी सब हम जनैत भेलंहू ख़ुशी स: ओत प्रोत !!
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट
अशांत मधेस@प्रभात राय भट्ट















