मंगलवार, 31 जनवरी 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

            गजल
कुमुदिनी  पर  भँभर  किये  मंडराईय
यौ पिया कहू नए दिल किये घबराईय  
 
भँभर कुमुदिनी सं मिलन करैत छैक
ये सजनी अहांक दिल किये घबराईय
 
मोनक बगिया में नाचैय मोर मयूर यौ
मोनक उमंग सं दिल किये घबराईय
 
अहाँक  रोम रोम में अछि प्रेमक तरंग
 प्रेमक  तरंग  सं  दिल किये घबराईय
 
प्रीतक बगिया में कुहकैय छैक कोईली
मधुर स्वर सुनी दिल किये घबराईय
 
मोन उपवनमें भरल प्रीतक श्रिंगार
मिलन  कय  बेर दिल किये घबराईय
...............वर्ण:-१६...............
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

सोमवार, 30 जनवरी 2012

गजल@ प्रभात राय भट्ट

            गजल   
आब कहिया तक  रहतै, हमर मोन उदास यौ पिया
होलीमें गाम एबैय,तोड़ब नै हमर विस्वास यौ पिया 

अहांक  ईआद  में  तर्सल जिया,बरसल नैना सं नीर
बैषाखी बीत बरषलै सावन,बुझलै नै प्यास यौ पिया

सुकसुकराती  दियाबाती, बितगेल  दष्मी  दशहरा  यौ 
छैठो में गाम नै एलौं, तोड़ी देलौं मोनक हुलास यौ पिया  

मोन भ S गेल आजित, कहिया भेटत अहाँक दुलार  यौ
एबेर फागुमें अहाँ आएब,मोन में अछि आस यौ पिया 

जौं गाम नै आएब, हमर मुइलो  मुह  देख नै पाएब
फेर ककरा संग करब, प्रीतक भोग विलास यो पिया 
....................वर्ण:-२१..............................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट


रविवार, 29 जनवरी 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

             
             गजल  
मिथिलाक पाहून भगवान श्रीराम छै
जग में सब सं सुन्दर मिथिलाधाम छै
 
मिथिलाक मईट सं अवतरित सीता
जग में सब सं सुन्दर हुनक नाम छै
 
मिथिलाक शान बढौलन महा विद्द्वान
कवी कोकिल विद्यापति हुनक नाम छै
 
भS जाएत अछि सम्पूर्ण पाप तिरोहित
मिथिला एकटा पतित पावन धाम छै
 
भेटत नै एहन अनुपम अनुराग
प्रेम परागक  कस्तूरी मिथिलाधाम छै
 
घुमु अमेरिका अफ्रीका लन्दन जापान
जग में नै कोनो दोसर मिथिलाधाम छै
 
मिथिला महातम एकबेर पढ़ी  जनु
मिथिला सं पैघ नै कोनो दोसर धाम छै
 
जतय भेटत कमला कोशी बलहान
अयाचिक दलान,वही मिथिलाधाम छै
 
गौतम कपिल कणाद मंडन महान
प्रखर विद्द्वान सभक मिथिलाधाम छै
 
ऋषि मुनि तपश्वी  तपोभूमि अहिठाम छै
"प्रभात"क गाम महान मिथिलाधाम छै
.............वर्ण:-१५...........
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

शुक्रवार, 27 जनवरी 2012

गजल @प्रभात राय भट्ट

       गजल
हम अहां केर  प्रीतम नहि बनी सक्लहूँ
मुदा अहांक करेजक दर्द बनी गेलहुं

अहां हमर प्रेम दीवानी बनल रहलौं
हम अहांक दीवाना नहि बनी सक्लहूँ

अहां हमर प्रेम उपासना करैत गेलौं
हम आनक वासना शिकार बनी गेलहुं 

अहांक कोमल ह्रदय तडपैत रहल
हम बज्र पाथर केर मूर्ति बनी गेलहुं 

हम अहांक निश्च्छल प्रेम जनि नै सकलौं
अनजान में हम द्गावाज बनी गेलहुं 

आब धारक दू किनार कोना मिलत प्रिये
मजधार में हम नदारत बनी गेलहुं
................वर्ण:-१६ ...............
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

गुरुवार, 26 जनवरी 2012

गीत@प्रभात राय भट्ट



बसु दरभंगा मधुवनी चाहे जनकपुर
हम सभ छि मिथिलावासी रहू जतय दूर
बसु बिराटनगर राजविराज चाहे लहान
हम सभ मिथिलावासी हमर मिथिला महान

बसु सीतामढ़ी शिवहर चाहे मुजफरपुर
हम सभ छि मिथिलावासी रहू जतय दूर
घर आंगनमे बहैय हमरा कमला कोशी बल्हान
भाईचारा प्रेम देखैला चालू अयाचिक दलान

राजर्षि जनक आँगन अवतरित भेल्हीं जनकदुलारी
मिथिला केर पाहून बनलाह राम लखन धनुषधारी
बसु मलंगवा जलेश्वर चाहे समस्तीपुर
हम सभ छि मिथिलावासी रहू जतय दूर

मिथिलाक गौरव मंडन कपिल कणाद वाचस्पति
जन जन केर आत्मा छथि कवी कोकिल विधापति
बसु अररिया खगड़िया चाहे भागलपुर
हम सभ छि मिथिलावासी रहू जतय दूर 

बसु सहरसा सुपौल मधेपुरा चाहे पूर्णिया
सम सभ छि मिथिलावासी जनै समूचा  दुनिया
बसु नेपाल बिहार मुंगेर कटिहार चाहे बेगुसराय
हम सभ छि मिथिलावासी  कियो  नहि  पराय  

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

बुधवार, 25 जनवरी 2012

रखु सम्हईर जुवानी जिआन नै करू@ प्रभात राय भट्ट

गीत
छोड़ी दिय आँचर पिया परेशान नै करू
सदिखन प्रेमलीला पैर एतेक धियान नै धरु
रखु सम्हैर जुवानी  जिआन  नै करू   
होबए दिय कने राईत एखन हैरान नै करू   

प्रेम  सागर  में  डुबकी  लगाएब  हम  अहांक  संग 
मोन के सम्हैर  रखु पिया एखन नै करू तंग 
अरमान अहांक पुराएब हमरो मोन में अछि उमंग  
रखु मोन पैर काबू पिया हम आएब अहांक संग

सास  मोर  आँगन  नंदी  बैसल  छथि  ओसार 
ससुर मोर दलान दियर जी बैसल छथि दुवार
लाज सरम सं देह कपैय नीक लगैय नहि दुलार
पैयाँ परैतछि सैयां जी खोलिदिय नए केवार

घरक मर्यादा रखु पिया करू नै नादानी
घर केर जुनी बुझियौ बलम फ़िल्मी कहानी
लोक बेद्क रखु मन बनू नै अज्ञानी
छोड़ी दिय आँचर सैयां करू नै मनमानी 

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट





मंगलवार, 24 जनवरी 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

                    गजल
आई हमर मोन एतेक उदास किये
सागर पास रहितों मोनमें प्यास किये

निस्वार्थ प्रेम  ह्रिदयस्पर्श केलहुं नहि
आई मोनमे बहै बयार बतास किये   

हम प्रगाढ़ प्रेमक प्राग लेलहुं नहि 
आई प्रीतम मोन एतेक हतास किये  

प्रेम  स्नेह  सागर  हम  नहेलहूँ नहि 
आई प्रेम मिलन ले मोन उदास किये   

हम मधुर मुस्कान संग हंस्लहूँ नहि   
आई दिवास्वपन एतेक मिठास किये  

"प्रभात" संग पूनम आएत आस किये  
नहि आओत सोचिक मोन उदास किये  
.................वर्ण-१५............................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट  

शुक्रवार, 20 जनवरी 2012

 गजल
विछोड्क व्यथा पीड़ा सं अछि हमर करेज फाटल   
सुईया धागा सं नै सिआयोत हमर करेज फाटल

कियो धका नै मारू हम सुखल गाछक ठाएरह  छि
ईआदक प्रेमलसा सं अछि हमर करेज साटल

प्रेम रोगी प्रितक मारल मरि मरि हम जिवैतछी
द्गावाज तलवार सं अछि हमर करेज काटल

ओ हाथ मे मेहँदी लगौने छथि हमर लाल खून सँ
हुनक  मांग  मे सिंदूर  देख  हमर  करेज  फाटल 

आनक संग ओ वेदिक सात फेरा लगबैत गेल्हिन
वेदिक आगि सँ जरल प्रेम हमर करेज फाटल

दर्द व्यथा की होएत अछि हमरा सँ कियो नहीं पुछू
दर्द वेदना सँ अछि "प्रभात" हमर करेज फाटल
.............वर्ण:-२० ......................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

गुरुवार, 5 जनवरी 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

                   गजल
अहां एना नए करू दिल बहकतै हमर
फेर अहां विनु कोना दिल सम्हरतै हमर 

अहांक संगही रहब हम जन्म जन्म तक
पिया अहां विनु कोना दिल धरकतै हमर 

रस भरल अंग अंगमें चढ़ल जोवनके
रसपान विनु कोना दिल चहकतै हमर 

नीसा लागल अछि बलम हमरो मिलनके
अहां विनु कोना प्रेमनीसा उतरतै हमर 

जे नीसा अहांक अधरमें ओ मदिरा में कहाँ
फेर पिने विनु कोना नीसा उतरतै हमर 

पिया पीब लिय पिला दिय जोवन रस जाम
पी विनु ठोरक प्याला कोना छलकतै हमर 
...............वर्ण-१७ ............
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट  

सोमवार, 2 जनवरी 2012

गजल @प्रभात राय भट्ट

             गजल
उईर जो रे पंक्षी नील गगन में
ल चल हमरो स्वच्छंद पवन में

जतय नै छैक कोनो सालसिमाना
उडैत रहब स्वच्छंद पवन में

रोईक सकत नै  टोईक सकत
जे कियो हमरा स्वच्छंद पवन में

करी बादल गर्जत मेघ पडत
रमन करब स्वच्छंद पवन में

करब दुरक दृश्य अवलोकन
मोन मग्न रहब नील गगन में

विचरण करी हम जनजन में
इच्छा "प्रभात"क मोन उपवन में
................वर्ण:-१३...............
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

रविवार, 1 जनवरी 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

                  गजल
हम तं कागज कलमक संयोग करबैत छी
कागज पैर शब्दक गर्भधारण करबैत छी 

कागज सियाहिक स्पर्श ले मुह बयेने रहैय
हम तं कागजक भाव बुझी किछु लिखदैत छी 

कागज जखन प्रसव पीड़ा सं छटपटाएत
तखन हम मोनक भाव सृजना करबैत छी 

मोनक उद्द्वेग कोरा कागज पैर उतरैय
लोग कहैय अहां बड निक रचना रचैत छी 

हम तं स्वर लय मात्र छन्द इ किछु नहीं जानी
लोग कहैय अहां बड निक गीत लिखैत छी 

हम तं वर्ण रदीफ़ काफिया किछु नै जनैत छी
लोग कहैय अहां बड निक गजल लिखैत छी 
.........................वर्ण:-१८........................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

शुक्रवार, 30 दिसंबर 2011

@प्रभात राय भट्ट

                      गजल
नव वर्षक नव उर्जा आगमन भS गेल अछी
दू:खद सुखद समय पाछू छुईटगेल अछी 

इर्ष्या द्दोष लोभ लालच आल्श्य कय त्याग करी
रोग  शोक  ब्यग्र  ब्याधा  सभटा  पडागेल अछी

नव  प्रभातक  संग  नव कार्य शुभारम्भ करी
नव वर्षक नवका  सूर्य  उदय   भS गेल अछी  

अशुभ छोड़ी शुभ मार्ग चलबाक संकल्प करी
दिव्यज्योति सभक मोन में जागृत भगेल अछी

निरर्थक अप्पन उर्जाशक्ति के ह्रास नहीं करी
शुख समृद्धि प्राप्तिक मार्ग प्रसस्त भS गेल अछी 

सुमधुर वाणी सं सबहक मोन जीतल करी
सामाजिक सहिंष्णुता आवश्यकता भS गेल अछी
.............................वर्ण:-१८ ...........................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट  

गजल@प्रभात राय भट्ट

                           गजल
नव वर्षक आगमन के स्वागत करैछै दुनिया 
नव नव दिव्यजोती सं जगमग करैछै दुनिया
 
विगतके दू:खद सुखद क्षण छुईटगेल पछा 
नव वर्षमें सुख समृद्धि  कामना करैछै दुनिया 
 
शुभ-प्रभातक लाली सं पुलकित अछी जन जन
नव वर्षक स्वागत में नाच गान करैछै दुनिया
 
नव वर्ष में नव काज करैएला आतुरछै सब
शुभ काम काजक शुभारम्भ में लागलछै दुनिया
 
नव वर्षक वेला में लागल हर्ष उल्लासक मेला
मुश्की मुश्की मधुर वाणी बोली रहलछै दुनिया
 
जन जन छै आतुर नव नव सुमार्गक खोजमे 
स्वर्णिम भाग्य निर्माणक अनुष्ठान करैछै दुनिया
 
धन धान्य ऐश्वर्य सुख प्राप्ति होएत नव वर्षमे
आशाक संग नव वर्षक स्वागत करैछै दुनिया
.............................वर्ण-१९.......................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

गुरुवार, 29 दिसंबर 2011

गजल@प्रभात राय भट्ट

                              गजल
लुईटलेलक देसक माल, खाली पडल खजाना छै
देखू नेता सबहक कमाल,भ्रष्टाचारके जमाना छै 

विन टाका रुपैया देने भैया,हएतो नै  कोनो काज रे
बातक बातमे घुस मांगै छै,घूसखोरीके जमाना छै 

टुईटगेल इमानक ताला,करै छै सभ घोटाला रे
धर्म इमानक बात नै पूछ,बेईमानक जमाना छै 

दिन दहाड़े चौक चौराहा,होईत छै बम धमाका रे 
बेकसूर मारल जाइत छै,देखही केहन जमाना छै 

लूटपाट में लागल छै,देसक  सभटा राजनेता रे 
काला धन सं भरल पडल,स्वीश बैंक के खजाना छै 

अन्न विनु मरै छै देसक जनता,नेता छै वेगाना रे 
गरीबक खून पसीना सं भरल, एकर खजाना छै

नेता मंत्री हाकिम कर्मचारी,सभ छै भ्रष्टाचारी रे 
गरीबक शोषण सभ करैछै,अत्याचारीके जमाना छै 

भ्रष्टाचारीके दंभ देख "प्रभात" भS गेल छै तंग रे
भ्रष्टतंत्र में लिप्त छै सरकार,भ्रष्टाचारीके जमाना छै
...........................वर्ण:-२०.................................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

मधेसी नेता सभ छथि बड बुधियार@प्रभात राय भट्ट

मधेसी नेता सभ छथि बड बुधियार
मधेस मुदा के बनौलक हथियार 
 
कियो नहीं कहू हिनका गद्दार आर मकार
मधेसी नेता सभ छथि बड़ ईमानदार
 
मधेस मुदा के राखैछ्थी यादगार
भलही मधेसी कें भेटैय नै अधिकार
 
उनचास मंत्रिमंडल में चौविस मधेसी
जुनी कियो कहू हिनका मालजाल मवेशी
 
राज्य समझैय हिनका सभके  विदेसी 
निसंदेह यी मवेशी सभ छथि स्वदेसी 
 
अपहरण हत्या सं मधेस अछि त्रस्त
लूटपाट में नेता....मुदा कियो नहीं कहू भ्रष्ट
 
चुनाव धैर जनता हिनकर माए बाप  
सता में पहुँचैत
 
हिनका पइर जाईतछैक अभिशाप
बापक सेवा में बुझाईत छैक हिनका पाप !!
 
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

बुधवार, 28 दिसंबर 2011

अधिकार नदिने हो भने स्वतंत्रता देऊ@प्रभात राय भट्ट

नेपाल  को  राजनीति  भुमंडलमा  दोहरो चरित्र भएका नेताहरुको चरितार्थ बाट सिधासोझा गरिब र निमुखा मधेशी जनताहरु पटक पटक ठगिएको छ नेपालको उदयकाल देखि हाल सम्म मधेशी जनताहरु माथि विभेदपूर्ण एन नीति नियम र असमानता को  कानुन बनाई मधेशीहरु लाई  नागरिक अधिकार  बाट टाढा राखिएको छ ! नेपाल र भारत एउटै समय मा स्वतन्त्रता प्राप्त गरेकाहुन सन् १९४७ मा भारतले अंग्रेज लाई परास्त गरि स्वतन्त्रता प्राप्त गर्यो यता नेपाल ले बि.स.२००७ मा राना शाशन लाई प्रस्ट गरि संबैधानिक प्रजातन्त्रको स्थापना गर्यो ! भारत क जनता र नेताहरु इमान्दार एवं कर्मनिष्ठ  भएका हुनाले आज संसारको हरेक रंगमंचमा आफ्नो सम्पन र समृद्ध प्रतिभाको मन्चन गरि सकेका छन् भने नेपालका राजनीति नेतृत्व र नेपाली जनता संकीर्ण र संकालू मानसिकताले कुण्ठित हुदै आईरहेका छन् ! मधेशी लाई आफ्नो प्रतिभा देखाउन बाट वन्चित गरेका छन् जसले गर्दा नेपालको शब्दकोष मा उनती प्रगति र विकाश भन्ने शब्द विलिन भैसकेको छ र नेपाल दिनानुदिन अवउनोती को रसातलमा पतन हुने तिर तिब्र गतिले लम्किदै गईरहेको छ ! जसको प्रमुख कारण हो नेपाली राजनेताहरु को स्वार्थलिप्सा र यिनीहरुको नेतृत्व उच्चवर्गीय समन्तिबाद हरु बाट नै प्रवाहित भएको देखिन्छन !
                             कस्तो अचम्भ लाग्ने कुरा छ भने देशको कुल जनसंख्या को लगभग २० प्रतिसत मात्र रहेका पहाडिया बाहुन छेत्रीहरुले सम्पूर्ण देश माथि बदनियतपूर्ण मनसायले एकलौटी कब्जा गरेका छन् बाँकि रहेको ८० प्रतिसत नेपाली जनता दास र दासी को जीवन गुजार्न बाध्य छन् ! आदिवासी जनजाती पिछडा वर्ग लगायत देशकै कुल जनसंख्याको ५२ प्रतिसत रहेको मधेशी समुदाय समेत अल्पसंख्यक खस सामन्तीहरुको दासत्व स्वीकार्न बाध्य छन् ! पहिलो पल्ट मधेशी जनताहरुले खस सामन्तीहरुको विरुद्धमा ६२/६३ को जनआन्दोलन देस ब्यापीरुपमा गर्यो र आन्दोलन निर्णायक तह सम्म पुग्ने वेलामा दोहरो चरित्र बोकेका नेताहरुले  मधेश मुद्दा लाई सम्बोधन गरेर आन्दोलन लाई ओझेलमा पारिदियो ! नत्र आज मधेशीले राज्य संग दयाको भिखमांगने अबस्था रहदैनथ्यो !  यथास्थितिबाद  का संग्रक्षकहरुले  मधेशीहरु लाई जन्मशिद्ध अधिकार र राष्ट्रिय पहुँच बाट दिर्घकाल सम्म टाढा राख्ने सुनियोजित चलखेलमा लागिपरेका छन ! मधेशीले आफ्नो अधिकार मांग्दा राष्ट्रघाती मांग हो भनेर वहिस्कार गर्दछन ! मधेशी नेताले मधेशीहरुको राष्ट्रिय पहिचान बनाउन खोज्दा राष्ट्रद्रोह को अभ्योग खेप्नु परेको छ मधेशी नेताले मधेशी जनताको मर्म दुख सरकार सम्म पुर्याउन लाई एक वर्ष कुड़दा पनि पालो पाउदैन यस्ता अनेक किसिमका समस्या मधेशीहरुले सामना गर्नु परेको छ !
                               लोकतन्त्र नेपालको अन्तरिम संविधानले आदेस गरे बमोजिम नेपाली सेना लाई पुनर्संरचना गरि राष्ट्रिय सेना बनाउने र १०००० हजार मधेशी लाई सेनामा समुहगत  समावेशी  गराउने पारित भएको थियो ! र जब आज त्यो समय आयो त्यसपछि दोहरो चरित्रका पृष्ठपोषकहरुले मधेशी लाई सेनामा समायोजन प्रक्रिया लाई राष्ट्रघाती को संज्ञा दिई अपमानित गरिरहेको छ ! धेरै कसरत हुदाहुदै अन्तिम मा मधेशी लाई सेनामा हाल रिक्त रहेको तिन हजार संख्या मा मात्र समायोजन गर्ने निर्णय मन्त्रि परिसद बाट पारित भयो ! मधेशी हरु यसलाई पनि सकारात्मक पक्ष नै मान्यो तर उच्चवर्गीय छ्द्म्भेदी सामन्तीहरु मधेशी लाई सेनामा समायोजन गर्ने विषय लाई पटक पटक राष्ट्रघाती भन्दै नाटकीय राष्ट्रवाद को मुदा उठाएर चर्को विरोद्ध गर्न उद्धत भएका छन !
                             जनसंख्याको आधारमा २०प्रतिसत मात्र रहेको बाहुन क्षेत्री नेपाल सेनामा ३४००० हजारको संख्यामा छन भने ५२ प्रतिसत रहेको मधेशी नेपाल सेनामा नगन्य संख्यामा छन ! यदि मधेसी लाई मधेशको पहिचान सहित सेनामा समावेशीकरण गर्ने कदम राष्ट्रघाती हो भने मधेशी को यो राष्ट्र हुदै होइन भने तथ्य प्रस्ट झल्किन्छ !यदि मधेशी लाई जन्मसिद्ध अधिकार,मौलिक हक, समानताको सु-अवसर र मधेश झल्किने खालको राष्ट्रिय पहिचान दिन सक्दैन भने मधेशको भुमि र मधेशी जनतालाई स्वतन्त्र गर्दिनु पर्छ ! अन्यथा मधेशीहरुले बाध्य भएर देश व्यापी रुपमा भिषण आन्दोलन गर्नेछन र देशले ठुलो छती व्योहोर्नु पर्छ !
                                आफ्नै भुमिमा मधेशी जनताहरु माथि परतन्त्र शाषक को विभेदपूर्ण शाशकीय पद्धति असहनीय भइसकेको छ ! देसको मेरुदण्ड भन्ने व्यबस्थापिका, कार्यपालिका र न्यायपालिका यो तिन वटै निकायले मधेशीहरु माथि विभेदपूर्ण र उपेक्षाकृत  व्यवहार  देखाउन कुनै  कसर  बाँकि  राखेको  छैन  ! देस को सम्पूर्ण अर्थतन्त्र को ७८ प्रतिसत अर्थ मधेश बाट पुरा हुन्छ मधेश अर्थतन्त्र को मेरुदण्ड हो,मधेश आर्थिक सम्पनताको मूल स्रोत हो तर मधेशी जनताको जीवन दयनीय छन ! देस लाई मधेश को उर्वरभूमि चाहियो,मलिला माटो फाटीला खेत चाहियो तर मधेशी जनता चाहिएन ! राज्यले मधेशी को जगा धन सम्पति लुटेर भुखा निमुखा गरिबी र दरिद्रता को सिकार बनाइएको छ ! मधेशी को जीवन स्तर एउटा नारकीय जीवन भन्दा कम भन्न मिल्दैन !
                                                                                                                        लेखक:-प्रभात राय भट्ट

मंगलवार, 27 दिसंबर 2011

प्रभात राय भट्ट

         गजल
प्रितक बगियामे फुल खिलैएलौं
मोनमे सुन्दर सपना सजैएलौं  

प्रेमक प्रतिविम्ब पैर पंख लगा
क्षितिजमें शीशमहल बनैएलौं

पंख टूईटगेल हमर क्षणमे
दर्द ब्यथा सं हम छटपटैएलौं

सपना  चकनाचूर  होईत देख
भाव विह्वल चीतकार कैएलौं  

कोमल फुल नै भS सकल अप्पन
कांटमें प्रेमक  अंकुरण कैएलौं

कहियो  तेह  प्रेमक कोढ़ी खीलत
कांटक चुभन हम सहैत  गेलौं
...............वर्ण१३ .....................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट



    

रविवार, 25 दिसंबर 2011

प्रभात राय भट्ट@प्राण की आहुति तक दिया था

तुमने जो आजादी की
सपना हमे दिखाया था
हमने उन सपनोको
अपने दिलमे सजाया था
काश ये सपना पूरा हो पता
हमारे बच्चे स्वतंत्र हो जाता
तेरे साथ साथ हमने भी
अपना कदम बढाया था
स्वतंत्र मधेश की यात्रा में
रक्त भी बहाया था
हमने अपने
सिने पर गोली खा कर
प्राण की आहुति तक दिया था
अफसोश इस बात की नहीं
की तुम मुझे भुला दी है
सुना है की तुम
कायर कांतर की भांति
पथभ्रष्ट हो गया है 
हम सहिदों की खून से
बहती नदिया में
तुम नहा धोकर
बहुरुपिया नेता कहलाने लगा है 
हम सहिदों की सपनेको
तुम अपने स्वार्थमें मिटाने लगा है
सता पाने की महत्वाकांक्षा में 
कभी मोर्चा बनाकर जुट जातें हो 
तो कभी स्वार्थलिप्सा में फुट जाते हो 
मोटी रकम मिलने पर 
खुद ही बिक जाते हो 
धिकार है,धिकार है,धिकार है
तुम  जैसे  मकार  नेताओ  पर  
धिकार .....है  
गिरगिट की तरह
रंग बदलनेवालों पर    
मधेश माँ तुझे ललकार रही है 
तेरी माँ तुझे धिकार रही है 
गुलामी की जंजीर में जकड़ी
तेरी माँ चीत्कार रही है 
पर तू विलीन है
दमनकारी के मेल में
लिप्त है तू पैसा कमाने के खेल में  
तेरी माँ अब भी राह देख रही है  
मेरा वीर सपूत वापस आएगा 
मुझे स्वतंत्र कर 
एक मधेश एक प्रदेश बनाएगा  
मधेशियों का जन्मशिद्ध अधिकार दिलाएगा 

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट  



गजल@प्रभात राय भट्ट

                            गजल
जगमे आब नाम धरी नहीं रहिगेल  इन्सान
मानवताकें  बिसरल  मनाब  भS गेल सैतान 

स्वार्थलोलुप्ता  केर  कारन  अप्पनो बनल आन
जगमे नहीं कियो ककरो रहिगेल भगवान

धन  सम्पतिक खातिर लैए भाईक भाई प्राण
चंद  रुपैया  टाका  खातिर भाई भS गेल सैतान 

अप्पने सुखमे आन्हर अछि लोग अहिठाम
अप्पन बनल अंजान दोस्त भS गेल बेईमान

मनुख बेचैय मनुख, मनुख लगबैय दाम
इज्जत बिकल,लाज बिकल, बिकगेल सम्मान 

अधर्म  पाप सैतानक  करैय  सभ  गुणगान  
धर्म बिकल, ईमान बिकल, बिकगेल  इन्सान 

पग  पग  बुनैतअछ  फरेबक  जाल  सैतान  
कोना जीवत "प्रभात"मुस्किल भS गेल भगवान 
....................वर्ण:-१८.....................................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट  

शनिवार, 24 दिसंबर 2011

गजल@प्रभात राय भट्ट

             गजल
कनिया ए कनिया एना करैछी किया
फाटैए करेज हमर जरैय  जिया

चढ़ल जवानीमे नए करू नादानी
करेजमे साटी जुड़ाउ हमर हिया

जखन तखन नखरा देखबैतछी
एना रुसल फूलल रहैतछी किया

सैद्खन अहींक सुरता करैतछी
अहांक प्रेम स्नेह लए तर्शैय जिया

लग आबू सजनी आब नए तर्साबू
आगि  लागल  तन  मोन  जरैय जिया

तरस देखाबू हमरा पैर सजनी
अहिं लए फाटैए रानी हमर हिया

नखरे नखरामे वितल उमरिया
स्नेहक प्यासल रहल हमर जिया

अहां सं हम दूर भS जाएब सजनी
तखन बुझब की होईत अछी पिया

घुईर  नै आएत अहांक "प्रभात" पिया  
रटैत  रहब गोरी अहां पिया पिया
...................वर्ण:-१४.........................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट