शुक्रवार, 20 अप्रैल 2012

मधेशी नेताहरु को भूल र प्राश्चित@प्रभात राय भट्ट

मधेशी नेताहरु को भूल र प्राश्चित

मधेशी नेताहरूले विगतका समयमा गरेको गलती स्विकार्दै प्राश्चित हुने तत्परता व्यक्त गरेका छन !यिनीहरुले गरेका गल्ति बाट मधेश को मुख्य मुद्दा नै धरापमा पर्यो ६२/६३ को मधेश आन्दोलनले दिएको जनादेश अन्तरिम संविधानले दिएको सुवर्ण अवसर बाट जति सक्दो छिटो लाभ उठाउनु पर्थ्यो तर नेताहरु बेखबर भई मधेश मुद्दा लाई अवमुल्यन गर्यो ! मधेशी जनताले देखेको सपना दिएको बलिदान लाई मधेशी नेताहरु ले पटक पटक छ्ताछुल र मथर पार्ने काम गरियो आ-आफ्नो स्वार्थलिप्सा मा पार्टी फोड़ने अलग पार्टी निर्माण गर्ने सत्ता र कुर्शी पाउन को लागी मधेश विरोद्धी तत्वहरु संग सांठघांट गरी मंत्री बन्ने र मधेश को मुद्दा लाई बिर्सने प्रबृति का कारन मधेशी युवा शक्तिहरू को मनोबल मा ह्रास देखिएको छ !  


                      विडम्बना भनौ मधेश मुद्दा लिएर संविधान सभाको महल मा प्रवेश गरेका मधेशी नेताहरु काठमाडौँ लगायत विभिन्न सुख सुबिधा संम्पन्न शहरहरुमा आफ्नै महल ठड्याउने रकम जुटाउन मा लागि परे ! यता मधेशी नेताहरु को मनसाय बुझेर धुर्त चालबाज़ शाषकले हड्डी फाल्ने कम को सुरुवात गर्यो र मधेशी नेताहरुले हड्डी पाउन का लागि आफैमा लुछालुछ गर्न थाल्यो जसले हड्डी पायो उसलाई निल्न साह्रो भयो जसले पाएन उसलाई पार्टी मा अटाउन गाह्रो भयो अन्तः निरङ्कुश शाषक का उत्तराधिकारी हरु को जालमा मधेशी नेताहरु फसेर मधेशको मूल मुद्दा लाई बिर्सिदै गयो,यता मधेशीहरु को सपना माथि तुसारापात हुने क्रमको सुरुवात भयो,मधेशका वीर सहिद हरुले दिएको बलिदान को अवमुल्यन हुदै गयो,चेतनशील मधेशी युवाहरु लाई निरुत्साहित पर्ने काम गरियो,सरकारी निकायको मातहतमा हतियारधारी गिरोह गठन गराई मधेश मा कोहराम मचाईयो मधेश को शान्ति भंग गराईयो लुटपाट,अपहरण,हत्या,चन्दा,फिरौती को संजाल बढ्दै गयो ! बेरोजगार मधेशी युवाहरु लाई सरकारी रेख देख मा अपराधिक गतिविधिमा सामेल गराईयो मधेशको अर्थतन्त्र लुटेर मधेशीहरु को आर्थिक स्थिति लाई कमजोर बनाईयो स्वार्थ पुरा भै सके पछी फेरी सरकार द्द्वारा नै तिनीहरु को निर्ममता पुर्बक हत्या गराईयो एक शब्द मा भन्नुपर्दा मधेशमा भयावह: स्थिति को सिर्जना भयो र यो सबै आरोप निराधार मधेश का राजनैतिक लडाकु दलहरुको (शसस्त्र क्रान्तिकारीहरुको )टाउकोमा थुपार्यो ! नेपाल का संचार जगतले पनि वैमन्यस्ता ढंग बाट क्रान्तिकारी राजनैतिक दलहरु को संख्यामा बढोत्तरी गरि १२० को संख्या मा रहेको कपोकल्पित सुचना समाचार प्रसारण गर्यो जब कि सत्य तथ्य जाने हो भने तिनीहरु को संख्या करिब २० को हर हरि मा थियो बाँकि रहेका हतियारधारी समुह हरु मधेशी हरु को जीवन यापन कस्टकर बनाउन क निमित शाषक वर्ग बाट नै संचालित थियो !


                     उपरोक्त घटनाहरु का जिम्मेबार मधेशी नेताहरु नै हुन् नेताहरु विश्वास गुमाई सकेका छन् जनताहरु को विश्वास जित्न लाइ गाह्रो पर्ने छन् !तर एक चोटी फेरी मधेशीहरु ले विस्वाश गर्नु पर्ने समय आएको छ मधेशी नेताहरुले आफ्नो भुल लाइ प्रास्चित गर्न चाहन्चन भने हामी जनता ले साथ दिनु पर्छ शाषक वर्ग का उत्तराधिकारी हरु संघियता बिनाको संविधान र मधेश लाइ टुक्र्याउने दाउपेच मा लागि परेको संकेत देखा परेका छन् यसको विरुद्धमा र मधेशी को पहिचान झल्किने खालको राज्य पुनर्संगठन को माग को लागि मधेशी नेताहरु बीच मोर्चाबन्दी हुनु सार्थक पक्ष हो ! मधेशीमोर्चा लाई सघाउने र साथ दिन का लागि पहाडे बाहुन क्षेत्री शाषक बाट पिडित जनजाती आदिवासी मंगोलियन र पिछडावर्ग का नेतृत्व गर्ने सम्पूर्ण निकायले आफु बीच छलफल गर्दै छन् यस्तो अबस्थामा हामी मधेशी बुद्धिजीवी वर्ग किसान कर्मचारी र परिवर्तन का मूल श्रोत मानिने युवा वर्ग अग्रपंक्ति मा ससक्त कदम चाल्नु पर्छ हामी सबै पिडित जनताहरु एकजुट भई मधेश को मूल मुदा आत्म निर्णय सहित को "एक मधेश एक प्रदेश" प्रति सक्रिय भूमिका निर्वाह गर्ने हो भने मधेशी जनताले आफ्नो स्वतंत्रता,मौलिक अधिकार,गुमिएको अस्मिता प्राप्ति बाट कसैले रोक्न सक्दैन ! हाम्रो एकता नै हाम्रो सफलता हो !! जय मधेश !!!

लेखक:प्रभात राय भट्ट

गुरुवार, 19 अप्रैल 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

                गजल                             

हमरा बिसैइर प्रीतम अहाँ जाएब कतय
एहन  प्रगाढ़ प्रेम स्नेह अहाँ पाएब कतय

टुईट नै सकैय प्रीतम साँच प्रेमक बन्हन
चिर प्रेमक बन्हन तोड़ी अहाँ जाएब कतय

बिसैइर केर  हमरा दिल लगाएब कतय
छोड़ी कें एसगर हमरा अहाँ जाएब कतय

अहाँक करेजक धड़कन में हम धड्कैत छि
कहू दिल से धड़कन निकाली जाएब कतय

"प्रभात"करेज में पसरल अछि हमर माया
अहाँक छाया हम छि छाया छोड़ी जाएब कतय  
................वर्ण:-१८................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

बुधवार, 18 अप्रैल 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

                                 गजल
दिल के दर्द दिल में दबौने नैयन में नोर नुकौने छि
के जानत हमर दिल के ब्यथा मुश्कैत ठोर देखौने छि

वेदना कियो कोना देखत चमकैत चेहरा कें भीतर
प्रियम्बदा केर एकटा राज हम बड जोर दबौने छि

वेकल अछ मोन धधकैत आईग में जरैत करेज
अशांत मोन भीतर मधुकर भावक शोर मचौने छि

तिरोहित भगेल अछि जीवनक उत्कर्ष केर संगम
मधुर मिलन कें अनुपम राग सं भोर गमकौने छि

आएल अमावस खत्म भेल ख़ुशी केर अनमोल पल
"प्रभात" इआदके बाती नोरक तेल सं ईजोर कौने छि

.......................वर्ण-२१...............
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

मंगलवार, 17 अप्रैल 2012

कविता@प्रभात राय भट्ट

मिथिला में मिथिलाक कर्णधार सभक बिच किछुदीन सं शीतयुद्ध चली रहलअछ कखनो होलिक रंग भजेतअछ वेरंग कखनो जुड़सीतल में फेकल थाल कादो क दाग कखनो फागक चर्चा उगलैय आईग  यही विषय पर हमर मोनक व्यथा कविताक रूप में प्रस्तुत कएलगेलअछ ! साधुवाद !!

        कविता

होली में देखलौं अजब गजब के रंग
शब्दक प्रहार सं भेलाह कतेको तंग
आपतिजनक शब्द शब्द सं घोरल छल रंग
अपमानक पिचकारी मारैय में कियो छलाह मतंग

मैथिल सभ में छै एकटा बड़का हुनर
आन के बेवकूफ बना अपना के कहत सुनर
फन्ना गदहा चिन्ना कीनर
मिथिला में मचल हुर्दंग हुलर

वितगेल होली मुदा रंगक दाग लागले रहिगेल
ईर्ष्या द्वेष प्रतिशोधक भावना जागले रहिगेल
देश दुनिया नर्क सं स्वर्ग भगेल
मुदा मिथिला स्वर्ग सं नर्क बनिगेल

होली पर भगेल जुड़ सीतल के प्रहार भारी
एक दोसर के गर्दन पर चलल चरित्र हत्या के आरी
जातपातक भेद भाव अछि विनाशकारी
संवेदनशील मुदा पर भरहलअछ  घीऊढारी

अपने में अछि सभ एक दोसर के विरुद्ध
मिथिलाक विद्द्वजन में भरहलअछ शीतयुद्ध
जातपात सं नै होइअछ कियो शुद्ध अशुद्ध
धर्म पुन्य सत्कर्म ज्ञान विवेक होइतअछ शुद्ध

मातल छथि सभ पी कS अभिमानक तारी
समय समय सं पढैय एक दोसर के गारी
लागल ऐछ फेक आईडी कय महामारी
छद्मभेदी सभक बिच भरहल छै मारामारी

हे मैथिल मिथिलाक कर्मनिष्ठ कर्णधार
कने देखाउ सद्भाव सद्प्रेमक उद्दगार
भलाबुरा तं छै समूचा जग संसार
एना कटाउंझ केला सं नै लागत कोनो जोगार

अवगुण दुर्गुण वैर भाव कय दूर भगाऊ
गुण शील विवेक प्रेम स्नेह मोन में जगाऊ
भाईचारा प्रेमक एकता दुनिया के देखाऊ
सुन्दर शांत समृद्ध विशाल मिथिला बनाऊ

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट



सोमवार, 16 अप्रैल 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

             गजल

एकटा बात कहू सजनी जौं हम नै रहब तं अहाँ रहब कोना
छोड़ी चलिजाएब जौं परदेश विरह कें दुःख अहाँ सहब कोना

पल पल हर पल हम रहैत छि प्रिया अहाँक संग सदिखन
हमर रूचि सं श्रृंगार करैत छि हमरा बिनु अहाँ सजब कोना

हमरा सँ सजनी अहाँ नुका कS नहि रखने छि दिल में राज कोनो
किछु बात जे हमही जानैत छि लाज सं ककरो अहाँ कहब कोना

मधुर मिलन लेल जी तरसत पिया पिया अहाँक मोन कहत
नैना सँ अहाँक नीर बहत तडपी तडपी अहाँ सम्हरब कोना

श्रृंगार बहत नोरक धार सँ ह्रिदय तडपत विछोडक पीड़ा सँ
भूख पियास नीन सभ त्यागी कें "प्रभातक"बाट अहाँ जोहब कोना
..............वर्ण-२५......................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

रविवार, 15 अप्रैल 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

                गजल

राईत दिन हम अहींक सुरता पिया कएने छि
दूर रहिक हमरा सं हमरा किया सतएने छि

कमला कोशी लेलक उफान मारैय हमर जान
बनी कें अन्जान पिया हमर जिया तरसएने छि

प्रेम परिणय आलिंगन लेल जी हमर तरसैय 
प्रेम मिलन ओ मधुर इआद सं हिया जुडएने छि

दिन गनैत बितैय दिन कोना जियव अहाँ विन
दिल के दिया में नोरक तेल सं दिया जरएने छि

सजी देखैछि ऐना सावन भादव बरसैय नैना
अहाँ विन जागी जागी "प्रभात"रतिया वितएने छि
................वर्ण-१९..................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट  

शनिवार, 14 अप्रैल 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

               गजल

चन्दन  कें गाछ पर बसेरा होए छै सांप कें  
जेना कान्हा पर बौआ सबारी होए छै बाप कें

बड दुःख उठा बाप बौआ के पैघ बनाबै छै 
चोट लागैछै बौआ कें  दर्द होए छै बाप कें  

प्रेम स्नेह माया ममताक  पात्र थिक संतान
सैतान छै संतान भान कहाँ होए छै बाप कें

काहि काटी कें बाप बेट्टा पर जीन्गी लुट्बैय
आला आफिसर भS कS बेट्टा नै होए छै बाप कें

सांप कें कतबो दूध पियाबू डैस लै छै सांप
बाप मागै छै भीख बेट्टा कहाँ होए छै बाप कें
..............वर्ण:-१७ .................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

मंगलवार, 10 अप्रैल 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

        
आइ अनचिन्हार आखर कें जन्म दिन थिक बर्ख 2008मे आइए केर तारीखसँ अ.आ मने अनचिन्हार आखर शुरू भेल अछि इ जानकारी आशीष अनचिन्हार जी द्द्वारा विदेह पर प्राप्त भेल तेहेतु अनचिन्हार आखर के समर्पित अछि हमर एकटा "गजल"

           गजल

आइ अ आ केर जन्मदिन थिक
हर्ष उलासक शुभदिन थिक

कोरा कागत पर अ आ लिखब
गजल लिखब शुभदिन थिक

ह्रिदय में उठल उद्वेग सं
गजल पढ़क शुभदिन थिक

कठोर ह्रिदय पलवित प्रेम
भाव सं भरब शुभदिन थिक

अ आ लिखल मैथिलिक गजल
गजल रचब शुभदिन थिक
वर्ण:-१२
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

संबाद@:-प्रभात राय भट्ट

                   संबाद !!

काका:- सुन रे बौआ  देशक हाल बड बेहाल छै 
             जनता के लुईट लुईट चोर नेता सभ नेहाल छै 


भतीजा:- सुन हो काका गामक छौरा सभ भSगेलैय चोर डाका 
               लुईट लुईट आनक धन ताडिखाना में उड़बैय छै टाका


काका:- कह रे बौआ पैढ़लिख तोहूँ आब करबे की ?
            भेटतहूँ  नहि कतहु नोकरी चाकरी कह तोहूँ आब करबे की ?


भतीजा:- पैढ़लिख हम नेता बनब काका करब देशक सेवा 
               भूख गरीबी दूर भगा करब हम जनसेवा 


काका:- देश डुबल छै कर्जा में बौआ नेता सभक खर्चा में 
            भ्रष्टाचारी नेता सभक नाम छपल छै अख़बार पर्चा में 


भतीजा:- भ्रष्टाचारी  नेता सभ कें मुह कारिख पोती गदहा चढ़ाऊ
               राजनीती में कुशल सक्षम युवा सभ के आगू बढ़ाऊ


काका:- जे जोगी एलई काने छेदेने नै छै ककरो ईमान रौ
            कायर गद्दार नेता सभ बेच  देलकैय स्वाभिमान रौ 


भतीजा:- क्रांतिकारी युगांतकारी युवा नेता में दियौ मतदान यौ
               सुख समृद्धवान  देश बनत ,बनत सभ कें अपन पहिचान यौ 
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट 

गजल@प्रभात राय भट्ट

            गजल

रिमझिम सावन बरसलै मोर अंगना
देखू सखी अंगना चलीएलै मोर सजना


अंगना में नाचाब हम खनका के कंगना
जन्म जन्मक पियास मेटलै मोर सजना


देखलौ मधुमास हम मनोरम सपना
अहाँ विनु करेज धरकलै मोर सजना


बैशाख जेठक अग्न सँ जरल छल मोन
अंग अंग में जलन उठलै मोर सजना


अहाँक छुवन सँ दिल में उठल जलन
मिलन लेल दिल तरसलै मोर सजना
वर्ण:-१६
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

शनिवार, 7 अप्रैल 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

               गजल:-

गजलक शब्द शब्द अछि हिरामोती जेना लगैय ज्योति
जीवनक विछोड मिलन में गजल जेना लगैय मोती

सोचक सागर में डूबी निकालैय कियो हिरामोती
अप्रतिम सुन्दर शब्दक संयोजन जेना लगैय मोती

सुन्दर नारी पर शब्दक गहना भSजाएत अछि भारी
गीत गजल सुन्दर शब्दक रचना जेना लगैय मोती

श्रृंगार रासक शब्द सं अछि नारी केर श्रृंगार सजल
अनुपम शब्दक अनमोल गजल जेना लगैय मोती

निशब्द भावक शब्द बनी ठोर पर घुन्घुनाए गजल
गजलकारक शब्द रचल गजल जेना लगैय मोती

..........वर्ण-२१....................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

शुक्रवार, 6 अप्रैल 2012

गीत@प्रभात राय भट्ट

    गीत@प्रभात राय भट्ट

लग आऊ लग आऊ सजनी कने चूल्हा पजारैछि
चूल्हा में आंच लगा कS सजनी अधन खौलाबैछि
भूख अछ बड जोर लागल एखन धैर नहि भात पाकल
भूक सँ मोन छटपट करैय होइए नै कम्हरो ताकल

एना नै चूल्हा पजरत बलम धुँआधुकुर किया केनेछी
उकुस मुकुस हमर मौन करैय एना किया सतौनेछी
पजरैय नै चूल्हा अहाँ सँ , अहाँ कोना पकाएब भात यौ
झट सँ चमच नीकाली पिया दहिए चुरा पर फेरु हात यौ

दही जमा कS मटकुरी में मलाई कतS नुकौनेछी
सुखल चुरा खुआ खुआ कS हमरा बड तरसौनेछी
चुरा दहिक संग हम खाएब दरभंगिया पुआ पकवान यए
छैयल छबीला हम छि गोरी जनकपुरिया नव जवान यए

दही जमौने मटकुरी में बलम हम अहिं लेल रखनेछी
खाऊ पिया मोन भईर के आई मुह किया लटकौनेछी
खुआ मलाई खूब खाऊ चाटी चाटी चिनिक चासनी यौ
दही चुरा पर पकवान ऊपर सं चाटु पिआर के चटनी यौ

रचनाकार:- गीत@प्रभात राय भट्ट

मंगलवार, 3 अप्रैल 2012

गीत@प्रभात राय भट्ट

गीत-

जहिया सँ देखलौं हम हुनकर सुरतिया
ईआद आबैय ओ हमरा आधी आधी रतिया
पूर्णिमा के पूनम सन हुनकर सुरतिया
हुनके रूप सँ होएत छैक सगरो ईजोरिया

चम् चम् चमकैय छै ओ जेना अगहन के ओस
नैयन मिलल हुनका उडिगेल हमर होस 
छम छम बजबैत पाएल ओ लग हमरा आएल
देख कS हुनक अधर उर्र भS गेलौं हम घाएल

मधुर बोली हुनक मादकता सं भरल जोवन
हिरन के चाल हुनक चंचल चितवन
अंग अंग सोन हुनक  सूरत हिरामोती
हुनक स्पर्श सं भेटैय आन्हर के ज्योति

गाल हुनक लागैय  जेना सुभ प्रभातक लाली
ठोर हुनक लगैय जेना मदिरा कें पियाली
मटैक मटैक चलनाए जेना मधुमासक पवन
सपना में आबी करै छथि ओ हमरा सं मिलन

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

सोमवार, 2 अप्रैल 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

                गजल:-

ठुमैक ठुमैक नै चलू गोरी जमाना खराब छै
मटैक मटैक  चलब कें जुर्वना वेहिसाब` छै

जान मरैय सबहक अहाँक चौवनी मुश्कान
अहिं पर राँझा मजनू सन दीवाना वेताब छै

कोमल कंचन काया अहाँक चंचल चितवन
जेना हिरामोती सं भरल खजाना लाजवाब छै

निहायर निहायर देखैय अहाँ कें सभ लोक
प्रेम निसा सं मातल सभ परवाना उताव छै

जमाना कहैय अहाँक रूप खीलल गुलाब छै
झुका कS नजैर अहाँक मुश्कुराना अफताव छै
............वर्ण:-१८.....................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

रविवार, 1 अप्रैल 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट


             गजल:-

जिन्गी तोंहू केहन निर्दय निष्ठुर भSगेलाए
छन में सभ सपना चकनाचूर कSदेलाए


छोट छीन छल बसल हमर नव संसार
संसार सं किएक तू हमरा दूर कSदेलए


दुःख सुख तं जीवन में अविते रहैत छैक
मुदा दुःख ही टा सं जिन्गी भरपूर कSदेलए


भईर नहि सकैत छि अप्पन दिल के घाऊ
चालैन जिका गतर गतर भुर कSदेलए


उज्जारही के छलौं हमर जीवनक फुलबारी
तेंह दिल झकझोरी किएक झुर कSदेलए


तडपी तडपी हम जीवैत छि एहन जिन्गी
जिन्गी तोंह दिल में केहन नाशुर कSदेलए


कर्मनिष्ठ बनी कय कर्मपथ पर चलैत छलौं
नजैर झुका चलै पर मजबूर कSदेलए
 .............वर्ण-१७........
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

शनिवार, 31 मार्च 2012

तुझे नेता कहू तो कैसे कहूँ ??@प्रभात राय भट्ट

तुझे नेता कहू तो कैसे कहूँ ??
तुझ में नेतृत्व की क्षमता है ही  नहीं
जो स्वार्थनीति में आसक्त हो
ओ क्या जाने राजनीती
राजनीती में जाहिल गवार हो तो क्या हुवा ?
तुम तो एक सौदागर हो
सौदा करने में माहिर भी हो
मुनाफा के लिए
गिरबी रख देते हो अपने माँ को
बेचदेते हो अपने वतन को
मोटी रकम मिलने पर
खुद भी बिक जाते हो

तुझे नेता कहू तो कैसे कहूँ ??
तुझ में नेतृत्व की क्षमता है ही नहीं
तिन पार्टी में तेरह गुट
पद पैसों  के लिए जाते हो फुट
तुम सारे के सारे पंगु नेता
स्वार्थलिप्सा में  हो वशीभूत  
ना तेरा कोई सिधान्त है
ना तेरा कोई जातपात है
तुम सारे गद्दार नेता का एकही जमात है

तुझे नेता कहू तो कैसे कहूँ ??
तुझ में नेतृत्व की क्षमता है ही नहीं
लूटपाट की खलबली मची है
तेरे घर की ईंट ईंट में
भ्रष्टाचारी की रंग लगी  है
तेरे बीबी की गहने में भी
भ्रष्टाचारी की छाप लगी है
तेरे बच्चो को सभी कहते है
गद्दार नेता तेरा बाप है
तू गद्दार की रजबीज का एक छाप है
भ्रष्टाचारी की बू
तेरे जिश्म से जाती ही नहीं  
लाज शर्म तो तुम्हे आती ही नहीं
तुझे नेता कहू तो कैसे कहूँ ??
तुझ में नेतृत्व की क्षमता है ही नहीं
रचनाकार:- प्रभात राय भट्ट

शुक्रवार, 30 मार्च 2012

गीत@प्रभात राय भट्ट

गीत:-

लचक लचक लचकै छौ गोरी तोहर पतरी कमरिया
ठुमैक ठुमैक चलै छे गोरी गिरबैत बाट बिजुरिया //२      
देख मोर रूपरंग मोन तोहर काटै चौ किये अहुरिया
सोरह वसंतक चढ़ल जुवानी में गिरबे करतैय बिजुरिया //२     मुखड़ा

चमक चमक चमकैय छौ गोरी तोहर अंग अंग
सभक मोन में भरल उमंग देखैला तोहर रूपरंग
ठुमैक ठुमैक चलै छे गोरी गिरबैत बाट बिजुरिया
रूप लगैय छौ चन्द्रमा सन देह लगैय छौ सिनुरिया //२

सोरह वसंतक चढ़ल जुवानी में गिरबे करतैय बिजुरिया
देख मोर रूपरंग मोन तोहर काटै चौ किये अहुरिया
 लाल लाल मोर लहंगा पर चमकैय छै सितारा
देख मोर पातर कमर मोन तोहर भेलौं किया आवारा //२

अजब गजब छौ चाल तोहर गोरिया गोर गोर गाल
कारी बादल सन केश तोहर ठोर छौ लाले लाल
चमकैय छे तू जेना चमकैय गगन में सितारा
देख के तोहर रूपक ज्योति मोन भेलैय हमर आवारा //२

मस्त मस्त नैयना मोर गोर गोर गाल
जोवनक मस्ती चढ़ल हमर ठोर लाले लाल
चमकैय छै मोर रूप जेना चमकैय अगहन के ओस
देख के मोर चढ़ल जुवानी उडीगेलय सभक होस //२
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

गुरुवार, 29 मार्च 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट


               गजल

फुलक डाएरह सुखल सुखल फुल अछी मुर्झाएल
वितल वसंत आएल पतझर देख पंछी पड़ाएल


भोग विलासक अभिलाषी प्राणी तोहर नै कुनु ठेगाना
आई एतय काल्हि जएबे जतय फुल अछी रसाएल


अपने सुख में आन्हर प्राणी की जाने ओ आनक दुःख
दुःख सुख कें संगी प्रीतम दुःख में छोड़ी अछी पड़ाएल


कांटक गाछ पर खीलल अछी मनमोहक कुमुदिनी
कांट बिच रहितो कुमुदनी सदिखन अछी मुश्काएल


बुझल नहीं पियास जकर अछी स्वार्थी महत्वकांक्षा
होएत अछी तृप्त जे प्रेम में सदिखन अछी गुहाएल


अबिते रहैत छैक जीवन में अनेको उताड चढ़ाव
सुख में संग दुःख में प्रीतम किएक अछी पड़ाएल
...........वर्ण-२१...................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

गजल@प्रभात राय भट्ट




   गजल
तड्पी तड्पी हम जीबैत छि
कहू धनी अहाँ कोना रहैत छि

एसगर निक नै लगैय धनी
अहींक सुरता हम करैत छि

हमरो विनु तडपैत छि अहाँ
से सोची सोची हम मरैत छि

मोन हमर कटैय अहुरिया
अहींक सपना हम देखैत छि

अहाँ हमरा सपना में आबी कें
हमरा पर प्रेम लुटबैत छि

मधुर बोली आर मादकता सँ
हम चरम उत्कर्ष पबैत छि

प्रभातक किरण आईख पर
परीते नीन सँ हम जागैत छि

सपना तं वस् सपना होईए
विछोड्क पीड़ा सँ तडपैत छि
.......वर्ण:-१२............
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट


सोमवार, 26 मार्च 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

               गजल:-
अप्पन आन सभ लेल अहाँ चिन्हार बनल छि
आS हमरा लेल किएक अनचिन्हार बनल छि

अहाँ एकौ घड़ी हमरा विनु नहीं रहैत छलौं
आई किएक हम अहाँ लेल बेकार बनल छि

कोना बिसरल गेल ओ प्रेमक पल प्रीतम
हमरा बिसारि आन केर गलहार बनल छि

हमर प्रीत में की खोट जे देलौं हृदय में चोट
अहाँक प्रीत में आईयो हम लाचार बनल छि

दिल में हमरा प्रेम जगा किया देलौं अहाँ दगा
दगा नै देब कही कs किएक गद्दार बनल छि

..................वर्ण:-१८............
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट