प्रभातकालीन मधेश

बुधवार, 29 फ़रवरी 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

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गजल मतलब के सब संगी, मतलबी छै सब लोक दुनिया में कियो नहि ककरो, स्वार्थी छै सब लोक स्वार्थक वशीभूत दुनिया की जाने ओ प्रेम प्रीत प्र...
सोमवार, 27 फ़रवरी 2012

गीत@प्रभात राय भट्ट

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गीत:- सजना सजना यौ हमर सजना सुनु सुनु ने कने हमर कहना //२ सजनी सजनी ऐ हमर सजनी                  मुखड़ा // कहू कहू ने जे किछु अछि कहना //...
शनिवार, 25 फ़रवरी 2012

गीत @प्रभात राय भट्ट

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गीत ऐ सजनी कने घुंघटा उठाऊ ने हमर प्राण प्रिया पूर्णिमा सन अहांक सूरत देखिला फाटेय हिया //२ थर थर कपैय देह मोर धरकैय करेज पिया यौ पिया ...
गुरुवार, 23 फ़रवरी 2012

गीत@प्रभात राय भट्ट

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गीत:- देखही रे भाई इ छौरी छै बड व्यूटी रौ पेन्ह कS मिनी स्कट चलबै छै स्कूटी रौ //२ देह देखार देख कS एकर  चढ़ल हमरा बोखार रौ कोना उतरत...
1 टिप्पणी:
बुधवार, 22 फ़रवरी 2012

gazal @prabhat ray bhatt

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                  gazal मनुखक दुर्गन्ध सं मनुख अछि परेशान शहर में भागाभागी दौड़ा दौड़ी भेल गेल कतेको जान शहर में गली गली में जाल बिछौने बै...

गजल @प्रभात राय भट्ट

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                गजल एसगर कान्ह पर जुआ उठौने,कतेक दिन हम बहु दर्द सं भरल कथा जीवनके,ककरा सं कोना हम कहू अपने सुख आन्हर जग, के सुनत हम...
मंगलवार, 14 फ़रवरी 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

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             गजल कतय भेटत एहन प्रेम जे मीत अहाँ देलौं मित्रताक कर्मपथ पर मोन जीत अहाँ लेलौं   स्वार्थक मीत जग समूचा , मोन मीत नहीं किय...

राष्ट्रीयता@प्रभात राय भट्ट

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राष्ट्रीयता भनेको राष्ट्रको माटो संग जसको प्रगाढ़ प्रेम हुन्छ,जसले राष्ट्रको प्राकृतिक भाषा भेष संस्कृति पर्यावरण जीवजन्तु  को संगरक्षण गर्छ...
शनिवार, 11 फ़रवरी 2012

गीत:-विरह@प्रभात राय भट्ट

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                  गीत:-विरह आबू हमरा लग आबू पिया निरमोहिया //   मुखड़ा सेनुरक लाज रखु हमर पिया सिनेहिया//२   कतय गेलहुं हमर प्रीतम चितचोर   ...
बुधवार, 8 फ़रवरी 2012

"दहेज मुक्त मिथिला” आंदोलन के जरिये मैथिल समाज में सुधार की एक नयी धारा --

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भारतीय संस्कृति के प्राचीन जनपदों में से एक राजा जनक की नगरी मिथिला का अतीत जितना स्वर्णिम था वर्तमान उतना ही विवर्ण है। देवभाषा संस्कृत की ...

गजल @प्रभात राय भट्ट

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                 गजल अहाँ सं हम प्रगाढ़ प्रेम करैत  छि  अहाँ किएक इ अपराध बुझैत छि    जिन्गी अछि हमर अहींक नाम धनी  हमरा किएक बदनाम बुझैत छि...
सोमवार, 6 फ़रवरी 2012

गीत @प्रभात राय भट्ट

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                  गीत   यौ  पिया मारु नै जुल्मी नजरिया की लच लच लचकय मोर कमरिया //२ मुखड़ा हमर  मोन  नै बह्काबू यौ पिया रखु अहां अपना दिल प...
रविवार, 5 फ़रवरी 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

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                                        गजल चंचल मोनक भीतर परम चैतन्य उर्जा सुषुप्त भेल अछि  मोह लोभ क्रोध रिस रागक तेज सं आत्मा सुषुप्त भे...

गजल@प्रभात राय भट्ट

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                         गजल     खुबसूरत बाजार में, मैं ही बस एक बदसूरत हूँ  जीता जगता इन्सानी चोला का, मैं तो बस एक मूरत हूँ   नजरों की न...
शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

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              गजल:- एकटा स्वपनपरी हाथ लेने गुलाब छै चन्द्रमा सन मुह पर लगौने नकाब छै   रौशनी नुकाबी से नकाबक ऑकाद कहाँ  पारदर्शी चेहरा पर धे...

गजल@ प्रभात राय भट्ट

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भ्रष्टाचारी सबहक बनल छै सरकार यौ देशक राजनेता सभ बनल छै गद्दार यौ झूठ फरेबक खेती में इ सभ अछि लागल सचाई सं मुह मोड़ी भागल सब मकार यौ ...
गुरुवार, 2 फ़रवरी 2012

भेदभावों की चिंगारी @प्रभात राय भट्ट

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भेदभावों की चिंगारी ने  हमारे  पूर्वजों की आत्मा को जलाया था  जलते हुए आत्माओं का अंगार बनके  मै इस जहाँ में आया था मेरे साथ भी वही हुवा  जो...
बुधवार, 1 फ़रवरी 2012

गीत@ प्रभात राय भट्ट

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गीत@ प्रभात राय भट्ट   सुन सुन रे  सुन पवन पुरबैया  की लेने चल हमरो अप्पन गाम   हमर जन्मभूमि वहि ठाम जतय छै सुन्दर मिथिलाधाम //२   देश विदेश...
मंगलवार, 31 जनवरी 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

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             गजल कुमुदिनी  पर  भँभर  किये  मंडराईय यौ पिया कहू नए दिल किये घबराईय     भँभर कुमुदिनी सं मिलन करैत छैक ये सजनी अहांक दिल किये ...
सोमवार, 30 जनवरी 2012

गजल@ प्रभात राय भट्ट

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            गजल     आब कहिया तक  रहतै, हमर मोन उदास यौ पिया होलीमें गाम एबैय,तोड़ब नै हमर विस्वास यौ पिया  अहांक  ईआद  में  तर्सल जिया,बरसल...
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