शनिवार, 21 अप्रैल 2012

सहयोग लेल खाता - दहेज मुक्त मिथिला" के संस्थागत खाता के पूर्ण डिटेल


दहेज मुक्त मिथिला - एक संस्था के रूप लेलक अछि। सभ के जानकारी देबय लेल चाहब जे एहि बेर सौराठ सभा में जानकी नवमी 

मनेबाक विचार अछि  ताहि के संग-संग अगिला सौराठ सभामें कोन तरहें सहभागी बनब ताहि विन्दुपर  विभिन्न विषय पर विचार करबाक योजना अछि। एहि में के सभ आबि सकैत छी वा के सभ अपन सहयोग पठा सकैत छी से जानकारी देल जाउ।
सहयोग लेल खाता - दहेज मुक्त मिथिलाके संस्थागत खाता के पूर्ण डिटेल

खाताधारक केर नाम :- सौराठ सभा विकास समिति एवं दहेज मुक्त मिथिला

खाता नं.:- 31742944456
खाताधारक केर बैंकक नाम :- भारतीय स्टेट बैँक
खाताधारक केर बैंकक पता :- रहिकामधुबनीबिहार
आई एफएस .सी . कोड:-SBIN0005897

(used for RTGS and NEFT transactions)
(
नोटकोष जमा केला के बाद डाशेखर चन्द्र मिश्र जिनक फोन नंबर निचां देने छीहुनका जानकारी अवश्य दी। आई एफएस .सीकोड अई लेल की जे सहयोगकर्ता ऑनलाइन सहयोग राशी जमा करचाही  जमा सकैत छी।)
कार्यक्रम के योजना:
विचार गोष्ठी २८ अप्रील २०१२ - दिनके  बजे सँ सभागाछी में।
जानकी नवमी ३० अप्रील २०१२ - भिनसर  बजे सँ सभागाछी में।
विधान परिषद्‌ सभापति तारा बाबु संग शिवनगरमें भेंटघाँट लेल प्रतिनिधि मंडल  बजे उपरान्त।
धन्यवाद!
प्रवीण नाचौधरी
दहेज मुक्त मिथिला
९१३५४६२२५१
००९७७-९८५२०२२९८१.
स्थानीय सम्पर्क:
डाशेखर चन्द्र मिश्र - ९२७९३४३०९०
पंशंभुनाथ झा - ८८०९८००६२३
दिल्लीमदन ठाकुर - ९३१२४६०१५०

शुक्रवार, 20 अप्रैल 2012

मधेशी नेताहरु को भूल र प्राश्चित@प्रभात राय भट्ट

मधेशी नेताहरु को भूल र प्राश्चित

मधेशी नेताहरूले विगतका समयमा गरेको गलती स्विकार्दै प्राश्चित हुने तत्परता व्यक्त गरेका छन !यिनीहरुले गरेका गल्ति बाट मधेश को मुख्य मुद्दा नै धरापमा पर्यो ६२/६३ को मधेश आन्दोलनले दिएको जनादेश अन्तरिम संविधानले दिएको सुवर्ण अवसर बाट जति सक्दो छिटो लाभ उठाउनु पर्थ्यो तर नेताहरु बेखबर भई मधेश मुद्दा लाई अवमुल्यन गर्यो ! मधेशी जनताले देखेको सपना दिएको बलिदान लाई मधेशी नेताहरु ले पटक पटक छ्ताछुल र मथर पार्ने काम गरियो आ-आफ्नो स्वार्थलिप्सा मा पार्टी फोड़ने अलग पार्टी निर्माण गर्ने सत्ता र कुर्शी पाउन को लागी मधेश विरोद्धी तत्वहरु संग सांठघांट गरी मंत्री बन्ने र मधेश को मुद्दा लाई बिर्सने प्रबृति का कारन मधेशी युवा शक्तिहरू को मनोबल मा ह्रास देखिएको छ !  


                      विडम्बना भनौ मधेश मुद्दा लिएर संविधान सभाको महल मा प्रवेश गरेका मधेशी नेताहरु काठमाडौँ लगायत विभिन्न सुख सुबिधा संम्पन्न शहरहरुमा आफ्नै महल ठड्याउने रकम जुटाउन मा लागि परे ! यता मधेशी नेताहरु को मनसाय बुझेर धुर्त चालबाज़ शाषकले हड्डी फाल्ने कम को सुरुवात गर्यो र मधेशी नेताहरुले हड्डी पाउन का लागि आफैमा लुछालुछ गर्न थाल्यो जसले हड्डी पायो उसलाई निल्न साह्रो भयो जसले पाएन उसलाई पार्टी मा अटाउन गाह्रो भयो अन्तः निरङ्कुश शाषक का उत्तराधिकारी हरु को जालमा मधेशी नेताहरु फसेर मधेशको मूल मुद्दा लाई बिर्सिदै गयो,यता मधेशीहरु को सपना माथि तुसारापात हुने क्रमको सुरुवात भयो,मधेशका वीर सहिद हरुले दिएको बलिदान को अवमुल्यन हुदै गयो,चेतनशील मधेशी युवाहरु लाई निरुत्साहित पर्ने काम गरियो,सरकारी निकायको मातहतमा हतियारधारी गिरोह गठन गराई मधेश मा कोहराम मचाईयो मधेश को शान्ति भंग गराईयो लुटपाट,अपहरण,हत्या,चन्दा,फिरौती को संजाल बढ्दै गयो ! बेरोजगार मधेशी युवाहरु लाई सरकारी रेख देख मा अपराधिक गतिविधिमा सामेल गराईयो मधेशको अर्थतन्त्र लुटेर मधेशीहरु को आर्थिक स्थिति लाई कमजोर बनाईयो स्वार्थ पुरा भै सके पछी फेरी सरकार द्द्वारा नै तिनीहरु को निर्ममता पुर्बक हत्या गराईयो एक शब्द मा भन्नुपर्दा मधेशमा भयावह: स्थिति को सिर्जना भयो र यो सबै आरोप निराधार मधेश का राजनैतिक लडाकु दलहरुको (शसस्त्र क्रान्तिकारीहरुको )टाउकोमा थुपार्यो ! नेपाल का संचार जगतले पनि वैमन्यस्ता ढंग बाट क्रान्तिकारी राजनैतिक दलहरु को संख्यामा बढोत्तरी गरि १२० को संख्या मा रहेको कपोकल्पित सुचना समाचार प्रसारण गर्यो जब कि सत्य तथ्य जाने हो भने तिनीहरु को संख्या करिब २० को हर हरि मा थियो बाँकि रहेका हतियारधारी समुह हरु मधेशी हरु को जीवन यापन कस्टकर बनाउन क निमित शाषक वर्ग बाट नै संचालित थियो !


                     उपरोक्त घटनाहरु का जिम्मेबार मधेशी नेताहरु नै हुन् नेताहरु विश्वास गुमाई सकेका छन् जनताहरु को विश्वास जित्न लाइ गाह्रो पर्ने छन् !तर एक चोटी फेरी मधेशीहरु ले विस्वाश गर्नु पर्ने समय आएको छ मधेशी नेताहरुले आफ्नो भुल लाइ प्रास्चित गर्न चाहन्चन भने हामी जनता ले साथ दिनु पर्छ शाषक वर्ग का उत्तराधिकारी हरु संघियता बिनाको संविधान र मधेश लाइ टुक्र्याउने दाउपेच मा लागि परेको संकेत देखा परेका छन् यसको विरुद्धमा र मधेशी को पहिचान झल्किने खालको राज्य पुनर्संगठन को माग को लागि मधेशी नेताहरु बीच मोर्चाबन्दी हुनु सार्थक पक्ष हो ! मधेशीमोर्चा लाई सघाउने र साथ दिन का लागि पहाडे बाहुन क्षेत्री शाषक बाट पिडित जनजाती आदिवासी मंगोलियन र पिछडावर्ग का नेतृत्व गर्ने सम्पूर्ण निकायले आफु बीच छलफल गर्दै छन् यस्तो अबस्थामा हामी मधेशी बुद्धिजीवी वर्ग किसान कर्मचारी र परिवर्तन का मूल श्रोत मानिने युवा वर्ग अग्रपंक्ति मा ससक्त कदम चाल्नु पर्छ हामी सबै पिडित जनताहरु एकजुट भई मधेश को मूल मुदा आत्म निर्णय सहित को "एक मधेश एक प्रदेश" प्रति सक्रिय भूमिका निर्वाह गर्ने हो भने मधेशी जनताले आफ्नो स्वतंत्रता,मौलिक अधिकार,गुमिएको अस्मिता प्राप्ति बाट कसैले रोक्न सक्दैन ! हाम्रो एकता नै हाम्रो सफलता हो !! जय मधेश !!!

लेखक:प्रभात राय भट्ट

गुरुवार, 19 अप्रैल 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

                गजल                             

हमरा बिसैइर प्रीतम अहाँ जाएब कतय
एहन  प्रगाढ़ प्रेम स्नेह अहाँ पाएब कतय

टुईट नै सकैय प्रीतम साँच प्रेमक बन्हन
चिर प्रेमक बन्हन तोड़ी अहाँ जाएब कतय

बिसैइर केर  हमरा दिल लगाएब कतय
छोड़ी कें एसगर हमरा अहाँ जाएब कतय

अहाँक करेजक धड़कन में हम धड्कैत छि
कहू दिल से धड़कन निकाली जाएब कतय

"प्रभात"करेज में पसरल अछि हमर माया
अहाँक छाया हम छि छाया छोड़ी जाएब कतय  
................वर्ण:-१८................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

बुधवार, 18 अप्रैल 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

                                 गजल
दिल के दर्द दिल में दबौने नैयन में नोर नुकौने छि
के जानत हमर दिल के ब्यथा मुश्कैत ठोर देखौने छि

वेदना कियो कोना देखत चमकैत चेहरा कें भीतर
प्रियम्बदा केर एकटा राज हम बड जोर दबौने छि

वेकल अछ मोन धधकैत आईग में जरैत करेज
अशांत मोन भीतर मधुकर भावक शोर मचौने छि

तिरोहित भगेल अछि जीवनक उत्कर्ष केर संगम
मधुर मिलन कें अनुपम राग सं भोर गमकौने छि

आएल अमावस खत्म भेल ख़ुशी केर अनमोल पल
"प्रभात" इआदके बाती नोरक तेल सं ईजोर कौने छि

.......................वर्ण-२१...............
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

मंगलवार, 17 अप्रैल 2012

कविता@प्रभात राय भट्ट

मिथिला में मिथिलाक कर्णधार सभक बिच किछुदीन सं शीतयुद्ध चली रहलअछ कखनो होलिक रंग भजेतअछ वेरंग कखनो जुड़सीतल में फेकल थाल कादो क दाग कखनो फागक चर्चा उगलैय आईग  यही विषय पर हमर मोनक व्यथा कविताक रूप में प्रस्तुत कएलगेलअछ ! साधुवाद !!

        कविता

होली में देखलौं अजब गजब के रंग
शब्दक प्रहार सं भेलाह कतेको तंग
आपतिजनक शब्द शब्द सं घोरल छल रंग
अपमानक पिचकारी मारैय में कियो छलाह मतंग

मैथिल सभ में छै एकटा बड़का हुनर
आन के बेवकूफ बना अपना के कहत सुनर
फन्ना गदहा चिन्ना कीनर
मिथिला में मचल हुर्दंग हुलर

वितगेल होली मुदा रंगक दाग लागले रहिगेल
ईर्ष्या द्वेष प्रतिशोधक भावना जागले रहिगेल
देश दुनिया नर्क सं स्वर्ग भगेल
मुदा मिथिला स्वर्ग सं नर्क बनिगेल

होली पर भगेल जुड़ सीतल के प्रहार भारी
एक दोसर के गर्दन पर चलल चरित्र हत्या के आरी
जातपातक भेद भाव अछि विनाशकारी
संवेदनशील मुदा पर भरहलअछ  घीऊढारी

अपने में अछि सभ एक दोसर के विरुद्ध
मिथिलाक विद्द्वजन में भरहलअछ शीतयुद्ध
जातपात सं नै होइअछ कियो शुद्ध अशुद्ध
धर्म पुन्य सत्कर्म ज्ञान विवेक होइतअछ शुद्ध

मातल छथि सभ पी कS अभिमानक तारी
समय समय सं पढैय एक दोसर के गारी
लागल ऐछ फेक आईडी कय महामारी
छद्मभेदी सभक बिच भरहल छै मारामारी

हे मैथिल मिथिलाक कर्मनिष्ठ कर्णधार
कने देखाउ सद्भाव सद्प्रेमक उद्दगार
भलाबुरा तं छै समूचा जग संसार
एना कटाउंझ केला सं नै लागत कोनो जोगार

अवगुण दुर्गुण वैर भाव कय दूर भगाऊ
गुण शील विवेक प्रेम स्नेह मोन में जगाऊ
भाईचारा प्रेमक एकता दुनिया के देखाऊ
सुन्दर शांत समृद्ध विशाल मिथिला बनाऊ

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट



सोमवार, 16 अप्रैल 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

             गजल

एकटा बात कहू सजनी जौं हम नै रहब तं अहाँ रहब कोना
छोड़ी चलिजाएब जौं परदेश विरह कें दुःख अहाँ सहब कोना

पल पल हर पल हम रहैत छि प्रिया अहाँक संग सदिखन
हमर रूचि सं श्रृंगार करैत छि हमरा बिनु अहाँ सजब कोना

हमरा सँ सजनी अहाँ नुका कS नहि रखने छि दिल में राज कोनो
किछु बात जे हमही जानैत छि लाज सं ककरो अहाँ कहब कोना

मधुर मिलन लेल जी तरसत पिया पिया अहाँक मोन कहत
नैना सँ अहाँक नीर बहत तडपी तडपी अहाँ सम्हरब कोना

श्रृंगार बहत नोरक धार सँ ह्रिदय तडपत विछोडक पीड़ा सँ
भूख पियास नीन सभ त्यागी कें "प्रभातक"बाट अहाँ जोहब कोना
..............वर्ण-२५......................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

रविवार, 15 अप्रैल 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

                गजल

राईत दिन हम अहींक सुरता पिया कएने छि
दूर रहिक हमरा सं हमरा किया सतएने छि

कमला कोशी लेलक उफान मारैय हमर जान
बनी कें अन्जान पिया हमर जिया तरसएने छि

प्रेम परिणय आलिंगन लेल जी हमर तरसैय 
प्रेम मिलन ओ मधुर इआद सं हिया जुडएने छि

दिन गनैत बितैय दिन कोना जियव अहाँ विन
दिल के दिया में नोरक तेल सं दिया जरएने छि

सजी देखैछि ऐना सावन भादव बरसैय नैना
अहाँ विन जागी जागी "प्रभात"रतिया वितएने छि
................वर्ण-१९..................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट  

शनिवार, 14 अप्रैल 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

               गजल

चन्दन  कें गाछ पर बसेरा होए छै सांप कें  
जेना कान्हा पर बौआ सबारी होए छै बाप कें

बड दुःख उठा बाप बौआ के पैघ बनाबै छै 
चोट लागैछै बौआ कें  दर्द होए छै बाप कें  

प्रेम स्नेह माया ममताक  पात्र थिक संतान
सैतान छै संतान भान कहाँ होए छै बाप कें

काहि काटी कें बाप बेट्टा पर जीन्गी लुट्बैय
आला आफिसर भS कS बेट्टा नै होए छै बाप कें

सांप कें कतबो दूध पियाबू डैस लै छै सांप
बाप मागै छै भीख बेट्टा कहाँ होए छै बाप कें
..............वर्ण:-१७ .................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

मंगलवार, 10 अप्रैल 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

        
आइ अनचिन्हार आखर कें जन्म दिन थिक बर्ख 2008मे आइए केर तारीखसँ अ.आ मने अनचिन्हार आखर शुरू भेल अछि इ जानकारी आशीष अनचिन्हार जी द्द्वारा विदेह पर प्राप्त भेल तेहेतु अनचिन्हार आखर के समर्पित अछि हमर एकटा "गजल"

           गजल

आइ अ आ केर जन्मदिन थिक
हर्ष उलासक शुभदिन थिक

कोरा कागत पर अ आ लिखब
गजल लिखब शुभदिन थिक

ह्रिदय में उठल उद्वेग सं
गजल पढ़क शुभदिन थिक

कठोर ह्रिदय पलवित प्रेम
भाव सं भरब शुभदिन थिक

अ आ लिखल मैथिलिक गजल
गजल रचब शुभदिन थिक
वर्ण:-१२
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

संबाद@:-प्रभात राय भट्ट

                   संबाद !!

काका:- सुन रे बौआ  देशक हाल बड बेहाल छै 
             जनता के लुईट लुईट चोर नेता सभ नेहाल छै 


भतीजा:- सुन हो काका गामक छौरा सभ भSगेलैय चोर डाका 
               लुईट लुईट आनक धन ताडिखाना में उड़बैय छै टाका


काका:- कह रे बौआ पैढ़लिख तोहूँ आब करबे की ?
            भेटतहूँ  नहि कतहु नोकरी चाकरी कह तोहूँ आब करबे की ?


भतीजा:- पैढ़लिख हम नेता बनब काका करब देशक सेवा 
               भूख गरीबी दूर भगा करब हम जनसेवा 


काका:- देश डुबल छै कर्जा में बौआ नेता सभक खर्चा में 
            भ्रष्टाचारी नेता सभक नाम छपल छै अख़बार पर्चा में 


भतीजा:- भ्रष्टाचारी  नेता सभ कें मुह कारिख पोती गदहा चढ़ाऊ
               राजनीती में कुशल सक्षम युवा सभ के आगू बढ़ाऊ


काका:- जे जोगी एलई काने छेदेने नै छै ककरो ईमान रौ
            कायर गद्दार नेता सभ बेच  देलकैय स्वाभिमान रौ 


भतीजा:- क्रांतिकारी युगांतकारी युवा नेता में दियौ मतदान यौ
               सुख समृद्धवान  देश बनत ,बनत सभ कें अपन पहिचान यौ 
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट 

गजल@प्रभात राय भट्ट

            गजल

रिमझिम सावन बरसलै मोर अंगना
देखू सखी अंगना चलीएलै मोर सजना


अंगना में नाचाब हम खनका के कंगना
जन्म जन्मक पियास मेटलै मोर सजना


देखलौ मधुमास हम मनोरम सपना
अहाँ विनु करेज धरकलै मोर सजना


बैशाख जेठक अग्न सँ जरल छल मोन
अंग अंग में जलन उठलै मोर सजना


अहाँक छुवन सँ दिल में उठल जलन
मिलन लेल दिल तरसलै मोर सजना
वर्ण:-१६
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

शनिवार, 7 अप्रैल 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

               गजल:-

गजलक शब्द शब्द अछि हिरामोती जेना लगैय ज्योति
जीवनक विछोड मिलन में गजल जेना लगैय मोती

सोचक सागर में डूबी निकालैय कियो हिरामोती
अप्रतिम सुन्दर शब्दक संयोजन जेना लगैय मोती

सुन्दर नारी पर शब्दक गहना भSजाएत अछि भारी
गीत गजल सुन्दर शब्दक रचना जेना लगैय मोती

श्रृंगार रासक शब्द सं अछि नारी केर श्रृंगार सजल
अनुपम शब्दक अनमोल गजल जेना लगैय मोती

निशब्द भावक शब्द बनी ठोर पर घुन्घुनाए गजल
गजलकारक शब्द रचल गजल जेना लगैय मोती

..........वर्ण-२१....................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

शुक्रवार, 6 अप्रैल 2012

गीत@प्रभात राय भट्ट

    गीत@प्रभात राय भट्ट

लग आऊ लग आऊ सजनी कने चूल्हा पजारैछि
चूल्हा में आंच लगा कS सजनी अधन खौलाबैछि
भूख अछ बड जोर लागल एखन धैर नहि भात पाकल
भूक सँ मोन छटपट करैय होइए नै कम्हरो ताकल

एना नै चूल्हा पजरत बलम धुँआधुकुर किया केनेछी
उकुस मुकुस हमर मौन करैय एना किया सतौनेछी
पजरैय नै चूल्हा अहाँ सँ , अहाँ कोना पकाएब भात यौ
झट सँ चमच नीकाली पिया दहिए चुरा पर फेरु हात यौ

दही जमा कS मटकुरी में मलाई कतS नुकौनेछी
सुखल चुरा खुआ खुआ कS हमरा बड तरसौनेछी
चुरा दहिक संग हम खाएब दरभंगिया पुआ पकवान यए
छैयल छबीला हम छि गोरी जनकपुरिया नव जवान यए

दही जमौने मटकुरी में बलम हम अहिं लेल रखनेछी
खाऊ पिया मोन भईर के आई मुह किया लटकौनेछी
खुआ मलाई खूब खाऊ चाटी चाटी चिनिक चासनी यौ
दही चुरा पर पकवान ऊपर सं चाटु पिआर के चटनी यौ

रचनाकार:- गीत@प्रभात राय भट्ट

मंगलवार, 3 अप्रैल 2012

गीत@प्रभात राय भट्ट

गीत-

जहिया सँ देखलौं हम हुनकर सुरतिया
ईआद आबैय ओ हमरा आधी आधी रतिया
पूर्णिमा के पूनम सन हुनकर सुरतिया
हुनके रूप सँ होएत छैक सगरो ईजोरिया

चम् चम् चमकैय छै ओ जेना अगहन के ओस
नैयन मिलल हुनका उडिगेल हमर होस 
छम छम बजबैत पाएल ओ लग हमरा आएल
देख कS हुनक अधर उर्र भS गेलौं हम घाएल

मधुर बोली हुनक मादकता सं भरल जोवन
हिरन के चाल हुनक चंचल चितवन
अंग अंग सोन हुनक  सूरत हिरामोती
हुनक स्पर्श सं भेटैय आन्हर के ज्योति

गाल हुनक लागैय  जेना सुभ प्रभातक लाली
ठोर हुनक लगैय जेना मदिरा कें पियाली
मटैक मटैक चलनाए जेना मधुमासक पवन
सपना में आबी करै छथि ओ हमरा सं मिलन

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

सोमवार, 2 अप्रैल 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

                गजल:-

ठुमैक ठुमैक नै चलू गोरी जमाना खराब छै
मटैक मटैक  चलब कें जुर्वना वेहिसाब` छै

जान मरैय सबहक अहाँक चौवनी मुश्कान
अहिं पर राँझा मजनू सन दीवाना वेताब छै

कोमल कंचन काया अहाँक चंचल चितवन
जेना हिरामोती सं भरल खजाना लाजवाब छै

निहायर निहायर देखैय अहाँ कें सभ लोक
प्रेम निसा सं मातल सभ परवाना उताव छै

जमाना कहैय अहाँक रूप खीलल गुलाब छै
झुका कS नजैर अहाँक मुश्कुराना अफताव छै
............वर्ण:-१८.....................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

रविवार, 1 अप्रैल 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट


             गजल:-

जिन्गी तोंहू केहन निर्दय निष्ठुर भSगेलाए
छन में सभ सपना चकनाचूर कSदेलाए


छोट छीन छल बसल हमर नव संसार
संसार सं किएक तू हमरा दूर कSदेलए


दुःख सुख तं जीवन में अविते रहैत छैक
मुदा दुःख ही टा सं जिन्गी भरपूर कSदेलए


भईर नहि सकैत छि अप्पन दिल के घाऊ
चालैन जिका गतर गतर भुर कSदेलए


उज्जारही के छलौं हमर जीवनक फुलबारी
तेंह दिल झकझोरी किएक झुर कSदेलए


तडपी तडपी हम जीवैत छि एहन जिन्गी
जिन्गी तोंह दिल में केहन नाशुर कSदेलए


कर्मनिष्ठ बनी कय कर्मपथ पर चलैत छलौं
नजैर झुका चलै पर मजबूर कSदेलए
 .............वर्ण-१७........
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

शनिवार, 31 मार्च 2012

तुझे नेता कहू तो कैसे कहूँ ??@प्रभात राय भट्ट

तुझे नेता कहू तो कैसे कहूँ ??
तुझ में नेतृत्व की क्षमता है ही  नहीं
जो स्वार्थनीति में आसक्त हो
ओ क्या जाने राजनीती
राजनीती में जाहिल गवार हो तो क्या हुवा ?
तुम तो एक सौदागर हो
सौदा करने में माहिर भी हो
मुनाफा के लिए
गिरबी रख देते हो अपने माँ को
बेचदेते हो अपने वतन को
मोटी रकम मिलने पर
खुद भी बिक जाते हो

तुझे नेता कहू तो कैसे कहूँ ??
तुझ में नेतृत्व की क्षमता है ही नहीं
तिन पार्टी में तेरह गुट
पद पैसों  के लिए जाते हो फुट
तुम सारे के सारे पंगु नेता
स्वार्थलिप्सा में  हो वशीभूत  
ना तेरा कोई सिधान्त है
ना तेरा कोई जातपात है
तुम सारे गद्दार नेता का एकही जमात है

तुझे नेता कहू तो कैसे कहूँ ??
तुझ में नेतृत्व की क्षमता है ही नहीं
लूटपाट की खलबली मची है
तेरे घर की ईंट ईंट में
भ्रष्टाचारी की रंग लगी  है
तेरे बीबी की गहने में भी
भ्रष्टाचारी की छाप लगी है
तेरे बच्चो को सभी कहते है
गद्दार नेता तेरा बाप है
तू गद्दार की रजबीज का एक छाप है
भ्रष्टाचारी की बू
तेरे जिश्म से जाती ही नहीं  
लाज शर्म तो तुम्हे आती ही नहीं
तुझे नेता कहू तो कैसे कहूँ ??
तुझ में नेतृत्व की क्षमता है ही नहीं
रचनाकार:- प्रभात राय भट्ट

शुक्रवार, 30 मार्च 2012

गीत@प्रभात राय भट्ट

गीत:-

लचक लचक लचकै छौ गोरी तोहर पतरी कमरिया
ठुमैक ठुमैक चलै छे गोरी गिरबैत बाट बिजुरिया //२      
देख मोर रूपरंग मोन तोहर काटै चौ किये अहुरिया
सोरह वसंतक चढ़ल जुवानी में गिरबे करतैय बिजुरिया //२     मुखड़ा

चमक चमक चमकैय छौ गोरी तोहर अंग अंग
सभक मोन में भरल उमंग देखैला तोहर रूपरंग
ठुमैक ठुमैक चलै छे गोरी गिरबैत बाट बिजुरिया
रूप लगैय छौ चन्द्रमा सन देह लगैय छौ सिनुरिया //२

सोरह वसंतक चढ़ल जुवानी में गिरबे करतैय बिजुरिया
देख मोर रूपरंग मोन तोहर काटै चौ किये अहुरिया
 लाल लाल मोर लहंगा पर चमकैय छै सितारा
देख मोर पातर कमर मोन तोहर भेलौं किया आवारा //२

अजब गजब छौ चाल तोहर गोरिया गोर गोर गाल
कारी बादल सन केश तोहर ठोर छौ लाले लाल
चमकैय छे तू जेना चमकैय गगन में सितारा
देख के तोहर रूपक ज्योति मोन भेलैय हमर आवारा //२

मस्त मस्त नैयना मोर गोर गोर गाल
जोवनक मस्ती चढ़ल हमर ठोर लाले लाल
चमकैय छै मोर रूप जेना चमकैय अगहन के ओस
देख के मोर चढ़ल जुवानी उडीगेलय सभक होस //२
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

गुरुवार, 29 मार्च 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट


               गजल

फुलक डाएरह सुखल सुखल फुल अछी मुर्झाएल
वितल वसंत आएल पतझर देख पंछी पड़ाएल


भोग विलासक अभिलाषी प्राणी तोहर नै कुनु ठेगाना
आई एतय काल्हि जएबे जतय फुल अछी रसाएल


अपने सुख में आन्हर प्राणी की जाने ओ आनक दुःख
दुःख सुख कें संगी प्रीतम दुःख में छोड़ी अछी पड़ाएल


कांटक गाछ पर खीलल अछी मनमोहक कुमुदिनी
कांट बिच रहितो कुमुदनी सदिखन अछी मुश्काएल


बुझल नहीं पियास जकर अछी स्वार्थी महत्वकांक्षा
होएत अछी तृप्त जे प्रेम में सदिखन अछी गुहाएल


अबिते रहैत छैक जीवन में अनेको उताड चढ़ाव
सुख में संग दुःख में प्रीतम किएक अछी पड़ाएल
...........वर्ण-२१...................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

गजल@प्रभात राय भट्ट




   गजल
तड्पी तड्पी हम जीबैत छि
कहू धनी अहाँ कोना रहैत छि

एसगर निक नै लगैय धनी
अहींक सुरता हम करैत छि

हमरो विनु तडपैत छि अहाँ
से सोची सोची हम मरैत छि

मोन हमर कटैय अहुरिया
अहींक सपना हम देखैत छि

अहाँ हमरा सपना में आबी कें
हमरा पर प्रेम लुटबैत छि

मधुर बोली आर मादकता सँ
हम चरम उत्कर्ष पबैत छि

प्रभातक किरण आईख पर
परीते नीन सँ हम जागैत छि

सपना तं वस् सपना होईए
विछोड्क पीड़ा सँ तडपैत छि
.......वर्ण:-१२............
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट


सोमवार, 26 मार्च 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

               गजल:-
अप्पन आन सभ लेल अहाँ चिन्हार बनल छि
आS हमरा लेल किएक अनचिन्हार बनल छि

अहाँ एकौ घड़ी हमरा विनु नहीं रहैत छलौं
आई किएक हम अहाँ लेल बेकार बनल छि

कोना बिसरल गेल ओ प्रेमक पल प्रीतम
हमरा बिसारि आन केर गलहार बनल छि

हमर प्रीत में की खोट जे देलौं हृदय में चोट
अहाँक प्रीत में आईयो हम लाचार बनल छि

दिल में हमरा प्रेम जगा किया देलौं अहाँ दगा
दगा नै देब कही कs किएक गद्दार बनल छि

..................वर्ण:-१८............
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

शनिवार, 24 मार्च 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

             गजल
अनचिन्हार सं जहिया चिन्ह्जान  बढल
तहिया सं हमरा नव पहिचान भेटल

विनु भाऊ बिकैत छलहूँ हम बाजार में
आई अनमोल रत्न मान सम्मान भेटल

काल्हि तक हमरा लेल छल अनचिन्हार
आई हमरा लेल ओ हमर जान बनल

अन्हरिया  राईत में चलैत छलहूँ हम
विनु ज्योति कहाँ कतौ प्रकाशमान भेटल

प्रभात केर अतृप्त तृष्णा ओतए मेटल
जतए अनचिन्हार सन विद्द्वान भेटल
.............वर्ण:-१६.................
रचनाकार :-प्रभात राय भट्ट


बुधवार, 21 मार्च 2012

परम पावन पुन्यभूमि अछि अपने मिथिलाधाम यौ@प्रभात राय भट्ट

मिथिला के हम बेट्टी छि मैथिलि हमर नाम यौ
जनक हमर पिता छथि जनकपुर हमर गाम यौ
जगमे भेटत नै कतहूँ एहन सुन्दर मिथिलाधाम यौ
परम पावन पुन्यभूमि अछि अपने मिथिलाधाम यौ

मिथिला के हम बेट्टा ची मिथिलेश हमर नाम यौ
मिथिला के हम वासी छि जनकपुर हमर गाम यौ
ऋषि महर्षि केर कर्मभूमि अछि मिथिलाधाम यौ
परम पावन पुन्यभूमि अछि अपने मिथिलाधाम यौ

मिथिलाक मैट सं अवतरित भेल्हीं सीता जिनकर नाम यौ
उगना बनी महादेव एलाह पाहून बनी कय राम यौ
धन्य धन्य अछि मिथिलाधाम,मिथिलाधाम जगमे महान यौ
परम पावन पुन्यभूमि अछि अपने मिथिलाधाम यौ

हिमगिरी के कोख सं ससरल कमला कोशी बल्हान यौ
मिथिला के शान बढौलन मंडन,कुमारिल,वाचस्पति विद्द्वान यौ
हमर जन्मभूमि कर्मभूमि स्वर्गभूमि मिथिलाधाम यौ
परम पावन पुन्यभूमि अछि अपने मिथिलाधाम यौ

कपिल कणाद गौतम अछि मिथिलाक शान यौ
विद्यापति के बाते अनमोल ओ छथि मिथिलाक पहिचान यौ
जगमे भेटत नै कतहूँ एहन सुन्दर मिथिलाधाम यौ
परम पावन पुन्यभूमि अछि अपने मिथिलाधाम यौ

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

मंगलवार, 20 मार्च 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

गजल-
अहाँ केर प्रेम में हम भेलौं बाबरिया
सुद्ध बुद्ध बिसारि हम देलौं सबरिया

प्रेमक गाछ पर अछि प्रेमक पलव
पलव पर नाम लिखी देलौं सबरिया

डरेछि हम कियो पलव नै तोड़ी दिए
सोंची सोंची प्रीतम हम भेलौं बाबरिया

मधुर मिलन केर  अछि आस लागल
दुनिया सं बांची कS हम एलौं सबरिया

भीख नै पियास अछि मिलन केर आस
जीवन में अहिं मिठास दलों सबरिया
............वर्ण-१५....
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

प्राचीन मिथिला@प्रभात राय भट्ट

मिथिला के मिथिलेश्वर महादेव हम की कहू यौ
स्वम अहाँ छि अन्तरयामी अहाँ सभटा जनैतछी यौ
बसुधाक हृदय छल हमर महान  मिथिला
इ  हमही  नै  शाश्त्र  पुराण  कहैय  यौ

मिथिलाक जन जन छलाह जनक एही  ठाम
ताहि लेल नाम पडल जनकपुर धाम
राजा जनक छलाह राजर्षि जनकपुरधाम में
सीता अवतरित भेलन्हि मिथिले गाम में

मिथिलाक पाहून बनी ऐलाह चारो भाई राम
विद्यापती के चाकर बनलाह उगना  एहि ठाम
चारो दिस अहिं छि महादेव जनकपुर के द्वारपाल
पुव दिस मिथिलेश्वरनाथ  पश्चिम जलेश्वरनाथ

उत्तर दिस टूटेश्वरनाथ दक्षिण कलानेश्वरनाथ
किनहू भs  सकय मिथिलाक प्राणी अनाथ
इ ध्रुव सत्य अछि प्राचीन  मिथिलाक  परिभाषा
एखुनो अछि एहन सुन्दर मिथिलाक अभिलाषा

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

गजल@प्रभात राय भट्ट

                     गजल:-
अहाँ विनु जिन्गी हमर बाँझ पडल अछि
सनेह केर पियासल काया जरल अछि


दूर रहितो प्रीतम अहाँ मोन पडैत छि
प्रीतम अहिं सं मोनक तार जुडल अछि


तडपैछि अहाँ विनु जेना जल विनु मीन
अहाँ विनु जिया हमर निरसल अछि


नेह लगा प्रीतम किया देलौं एहन दगा
मधुर मिलन लेल जिन्गी तरसल अछि


अहाँ विनु प्रीतम जीवन व्यर्थ लगैय
की अहाँक प्रेमक अर्थ नहीं बुझल अछि
..............वर्ण-१६...........
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

रविवार, 18 मार्च 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट

       गजल:-
वसंत ऋतू  में आएल सगरो वसंत बहार
वनस्पतिक पराग गमकौने अनन्त संसार


हरियर पियर उज्जर पुष्प आर लाले लाल
पुष्पक राग केर उत्कर्ष अछि वसंत बहार


झूमी रहल कियो गाबी रहल नाचे कियो नाच
पलवित भेल प्रेम मोन में अनन्त उद्गार


सीतल सुन्दर सजल बहैय वसंत पवन
मनोरम प्रकृतिक दृश्य अछि वसंत बहार


मोर मयूरक नृत्य मधुवन कुह्कैय कोईली
मधुर मुस्कान सगरो आनंद अनन्त संसार 


प्रेम मिलन मग्न प्रेमी पुष्पित वसंत बहार
मोन उपवन सुरभित भेल अनन्त संसार
.............वर्ण-१८.............
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

गुरुवार, 8 मार्च 2012

निबंध प्रतियोगिता



निबंध प्रतियोगिता



दिल्ली सँ प्रकाशित मासिक मैथिलि पत्रिका मिथिलांचल पत्रिका के द्वारा कक्षा ८ सँ ल के बी.ए/बी.एस.सी/ बी.कॉम/इंजीनियरिंग /चिकित्सा विज्ञानं के छात्र हेतु एकटा निबंध प्रतियोगिता रखल गेल अछि .
निबंध के विषय :- "मातृभाषाक माध्यम सँ विज्ञानं एवं प्रोद्योगिकी के शिक्षा कतेक सार्थक अछि "
जाही में प्रतिभागी हेतु नियम :-
१. कक्षा ९ सँ - स्नातक तक के छात्र भाग लय सकैत छथि
२. उम्र सीमा - १२ वर्ष -२२ वर्ष
३.रचना मौलिक हेबाक चाही एवं स्व लिखित हेबाक चाही
४.आलेख मैथिलि भाषा में हेबाक चाही
५.रचना पठेबक अंतिम तिथि - २५ मार्च २०१२
६. प्रतिभागी लोकनि अप्पन आलेख mithilanchalpatrika@gmail.com
या B-2/333 Tara Nagar, Old Palam Road Sec-15 Dwarka New Delhi-110078. पर पठाबी
७. आलेखक संग अप्पन परिचय एवं पत्राचारक पता अबश्य पठाबी
८. विशेष जानकारी हेतु संपर्क करी Mob -9990065181  /  9312460150  / 09762126759.

निर्णयाक मण्डली में छैथि :- १.डॉ. कैलाश कुमार मिश्र २.डॉ. प्रेम मोहन मिश्र ३. श्री गजेन्द्र ठाकुर ४. डॉ. शशिधर कुमार
पुरस्कार :- निबंध प्रतियोगिता में चयनित प्रतिभागी के समुचित पुरस्कार राशी एवं प्रमाणपत्र पठौल जाएत

भबदीय
डॉ. किशन कारीगर
(संपादक ) मिथिलांचल पत्रिका

बुधवार, 7 मार्च 2012

रंग जीवन के सरसता प्रदान करैत अछि

जीवन अऔर रंगक बिच अन्योन्याश्रित सम्बन्ध थिक ! दुनु के भीतर एक दोसरक अस्तित्व विधमान अछि ! रंग जीवन के सरसता प्रदान करैत अछि तं जीवन रंग कें जीवन्तता प्रदान करैत अछि !मनुखक जन्म संगही रंग के प्रति अनुराग उमड़ लगैत अछि ताहि सं जीवनक हरेक छन आर हरेक रंग एक दोसर में समागम अछि ! रंगक त्यौहार होली मिथिला, भारत ,नेपाल लगायत संसारक विभिन्न देस में अलग अलग रूप सं मनाएल जाईत अछि ! होली असत्य के ऊपर विजयक प्रतिक अछि ! एकरा लोक भाषा में होरी सब्द सं संबोधित कैलजायेत अछि ! होरी के शाब्दिक अर्थ सेहो अपने आप में बड महत्वपूर्ण अछ -"ह" के अर्थ आकाश "र"के अर्थ अग्नि या तेज होएत अछ "ओ"प्रणव अऔर 'ई"शक्ति के स्वरुप अछ तेह होरी= सम्पूर्ण ब्रह्मांड तेजपूर्ण हो ! प्रेमक पर्व होली हर्ष उलासक संग सभ गोटे मनाएल करी आ सद्भाव भाईचारा प्रेम समाज में बनाबी याह कमाना करैत सभ मित्रगन में हमर अशेष सुभकामना !!!
होली पर्वक अवसर पर हमरा दिस सं किछ विशेष उपहार अहाँ सभक लेल :-
गजल:- होली
रंग विरंगक रसरंग सं भौजी के रंगाएल चोली
रंग उडैए छै अवीर उडैए छै देखू आएल होली

होली के रंग में रंगाएल सभक एकही रूपरंग
दोस्ती के रंग में रंगाएल दुश्मन देखू आएल होली

प्रेम स्नेहक पावैन होली गाबैए गीत फगुआ टोली
रसरंग सरोवर भेल दुनिया देखू आएल होली

रंग में रंगाएल शरीर गाबैए गीत जोगी फकीर
गाबैए जोगीरा बजाबैए मृदंग देखू आएल होली

रंग उड़ाबैए रंगरसिया कियो उड़ाबैए अवीर
तन मोन सभक रंगाएल देखू आएल होली

......................वर्ण-२०.............
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट
गजल
आब कहिया तक रहतै, हमर मोन उदास यौ पिया
होलीमें गाम एबैय,तोड़ब नै हमर विस्वास यौ पिया
 
अहांक ईआद में तर्सल जिया,बरसल नैना सं नीर
बैषाखी बीत बरषलै सावन,बुझलै नै प्यास यो पिया

सुकसुकराती दियाबाती, बितगेल दष्मी दशहरा यौ
छैठो में गाम नै एलौं, तोड़ी देलौं मोनक हुलास यौ पिया
 
मोन भ S गेल आजित, कहिया भेटत अहाँक दुलार यौ
एबेर फागुमें अहाँ आएब,मोन में अछि आस यौ पिया 

जौं गाम नै आएब, हमर मुइलो मुह देख नै पाएब
फेर ककरा संग करब, प्रीतक भोग विलास यो पिया
...................वर्ण:-२१..............................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट
गीत :-
गाम आबिजाऊ हमर दुलरुवा पिया,आबिगेलई होली !!
अहि केर प्रेमक रंग स: रंगाएब हम अपन चोली !!
यी प्रेमक पाती में लिखरहल छि अपन अभिलाशाक बोली !!
अईबेर प्रभात भाईजी गाम अओता की नए पूछीरहल अछि फगुवा टोली !!
बौआ काका के दालान में बनिरहल अछि फगुवाक प्लान !!
चईल रहल छई चर्चा अहिके चाहे खेत होई या खलिहान !!
कनिया काकी कहै छथिन बौआ क देखला बहुते दिन भगेल !!
वित साल गाम आएल मुदा विना भेट केने चईल्गेल !!
अहाक संगी साथी सब एक मास पाहिले गाम आबिगेल्ल !!
अहाक ओझा २५ किल्लो क खसी आ भांगक पोटरी अहिलेल दगेल !!
 
गाम आबिजाऊ हमर दुलरुवा पिया जुड़ाउ हमर हिया !!
पूवा पूरी सेहो खिलाएब ,घोईर घोईर पियाएब हम अहाक भंग !!
अहि केर हाथक रंग स: रंगाएब हम अपन अंग अंग !!
रंग गुलाल अवीर उडाएब हम दुनु संग संग !!

गाम आबिजाऊ हमर दुलरुवा पिया,आबिगेलई होली
प्रेमक रंग स: तन मन रंगाएब एक दोसर के संग संग !!
रचनाकार :-प्रभात राय भट्ट
 
होली मनाबू किछु हुर्दंग शेरक संग :-
१.होली में जकरा घर आएल सारी ओ भेल माला माल
सारी के चोली में रंग ढारी करे गोर गाल लाले लाल
जोगीरा सारा रा रा रा रा रा ..........................//२

२.भैयाक सारी रंग अवीर ल क चालली खेले लेल होली
सारी के रसरंग देखि बुढ्बो के मुह सं चूमा चूमा के बोली
जोगीरा सारा रा रा रा रा रा ..........................//२

३.बिच बाज़ार पारी जिका रम्कैय भैया के सारी
फगुवा टोली मरैय रंगक पिचकारी सारी के पछारी
जोगीरा सारा रा रा रा रा रा ..........................//२

४.होली में भैया पीब खजुरक तारी भेलाह मतंग
भौजी पीब दूध में घोरी भंग पडल बिच आँगन चितंग
जोगीरा सारा रा रा रा रा रा ..........................//२

५.पीब क भौजी भंग बिच आँगन पडल चितंग
भैया करे रासलीला छोटकी सारी के संग
जोगीरा सारा रा रा रा रा रा ..........................//२

६.होली के रसरंग सं उठल सारी के मोन में तरंग
सारी बनल आधा घरवाली सुतल बिच पलंग
जोगीरा सारा रा रा रा रा रा ..........................//२

७.भैया पीब तारी बिच बाज़ार पडल चितंग
भौजी खेले होली छोटका दियर जी के संग
जोगीरा सारा रा रा रा रा रा ..........................//२

८.दूर देस सं होली खेलS गाम एलाह हमर भैया
भौजी के चोली में रंग उझली भैया नाचे था था थैया
जोगीरा सारा रा रा रा रा रा ..........................//२
 

शनिवार, 3 मार्च 2012

gazal @prabhat ray bhatt

गजल:- होली
रंग विरंगक रसरंग सं भौजी के रंगाएल चोली
रंग उडैए छै अवीर उडैए छै देखू आएल होली

होली के रंग में रंगाएल सभक एकही रूपरंग
दोस्ती के रंग में रंगाएल दुश्मन देखू आएल होली

प्रेम स्नेहक पावैन होली गाबैए गीत फगुआ टोली
रसरंग सरोवर भेल दुनिया देखू आएल होली

रंग में रंगाएल शरीर गाबैए गीत जोगी फकीर
गाबैए जोगीरा बजाबैए मृदंग देखू आएल होली

रंग  उड़ाबैए  रंगरसिया  कियो  उड़ाबैए अवीर
तन  मोन  सभक  रंगाएल  देखू आएल  होली

......................वर्ण-२०.............
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

शुक्रवार, 2 मार्च 2012

गीत:-प्रभात राय भट्ट

गीत:-
टुईट नै सकैय विधना के विधानक लकीर
बदैल नै सकैय कियो अप्पन तक़दीर //२

पंचतत्व रचित इ अधम शरीर
घाऊ अछि सभक मोन में गंभीर
सुख के खोज में दुनिया लागल
राजा रंक जोगी फकीर .............
हो भैया, राजा रंक जोगी फकीर
टुईट नै सकैय विधना के विधानक लकीर//
बदैल नै सकैय कियो अप्पन तक़दीर //२

सुख नहि हुनका भेटल जग में
जे दुःख सं मुह  मोड़ी पड़ाएल 

जराबू मोन में जीवन दर्शन ज्योति
दुःख क सागरमे भेटै छैक
सुख स्वरुप अपार हिरामोती
टुईट नै सकैय विधना के विधानक लकीर//
बदैल नै सकैय कियो अप्पन तक़दीर //२

भाग्य सं बढ़ी के जगमे किछु नहीं बलवान
पल में राजा रंक भेल विप्र बनल धनवान
राजपाठ सभ त्यागी भेल राम लखन वनवासी
बिक गेल राजा हरिश्चंद्र बनल डोमक दासी
हो भैया,राजा हरिश्चंद्र बनल डोमक दासी
टुईट नै सकैय विधना के विधानक लकीर //
बदैल नै सकैय कियो अप्पन तक़दीर //२

जीवन एक संघर्ष दुःख छै महा संग्राम
कांटक डगैर चलैत रहू लिय नै विश्राम
दुःख क संघर्ष सं भेटैय छै सुख आराम
दुःख सुख छै जीवन,जिनगी एकरे नाम
हो भैया,जिनगी एकरे नाम ..............
टुईट नै सकैय विधना के विधानक लकीर //
बदैल नै सकैय कियो अप्पन तक़दीर //२
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट


गुरुवार, 1 मार्च 2012

गीत:-प्रभात राय भट्ट

          गीत:-
अप्पन हारल बहुक मारल
हम दै छि सभटा बिसारि //२  मुखड़ा

कनिया हमर बड अलबेला
रोज रोज देखबैय नव खेला
हमरा बनौलक बादर
हमर कनिया बनल मदारी........
अप्पन हारल बहुक मारल
हम दै छि सभटा बिसारि ...//२


आँगन में लगैय रोज मेला
देखैला कनियाक नव नव खेला
नागिन जिका नाच करेय
दैय सब कय नव नव गारी
अप्पन हारल बहुक मारल
हम दै छि सभटा बिसारि //२

कनियाक चाही पलंग पर चाय
भानस भात सभटा करेय माए
सब कियो खैय रुखा सुखा
कनिया के चाही चैर पाँच गो तरकारी
अप्पन हारल बहुक मारल
हम दै छि सभटा बिसारि //२

कनिया हमर हठा पठा
खैय छै एक नाद घठा
मीट मछली रोज चाही
ऊपर सं खुवा मलाई पुष्टकारी
अप्पन हारल बहुक मारल
हम दै छि सभटा बिसारि //२

कनिया हमर बड बलवान
लगैय छै पठा पहलवान
अनेरे करेय छै रगरा झगरा
जौं कियो बाजल तं देय छै सभ के घीसारी
अप्पन हारल बहुक मारल
हम दै छि सभटा बिसारि //२

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट