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शनिवार, 17 सितंबर 2011

हम परदेशी@प्रभात राय भट्ट

हम परदेशी  परदेश में रहैतछी
की कहू कोना कोना  जिबैतछी
माए बाबूजीक बड याद आबैय
हमर सूनरी कनियाँ मोन परैय
माए केर ममता ल्या मोन हहरैय
बाबूजीक स्नेहदुलार  ल्या जी तर्सैय
गामक जिनगी मोन परैय



हम परदेशी  परदेश में रहैतछी
की कहू कोना कोना  जिबैतछी
लाल भैया कें डाटफटकार
बडकी भौजीक प्यार दुलार
हमर कनियाक मीठ मीठ बोली
पाबैन त्यौहार दशहरा होली
ई सभटा हमरा  मोन परैय

हम परदेशी  परदेश में रहैतछी
की कहू कोना कोना  जिबैतछी
बाट तकैत हेती बोहीन हाथमें लेने राखी
पुछैत हेती भैयाके आबैमे कतेक दिन बांकी
माए कहैत हेती सुनु यए दुल्हिन
भोरे भोर चनवार पैर कुचरैय कौआ
परदेश छोड़ी गाम अबैय हमर बौआ
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट


रविवार, 13 फ़रवरी 2011

फैस्गेल मधेसी जनता @प्रभात राय भट्ट


फैस्गेल मधेसी जनता बहुरुपिया नेताक जालमे !!
मधेसक शक्ति विभक्त भगेल दमनकारी शोसक के चालमें !!
जे भेलैथ मंत्री पद अध्यक्ष पद क आ अपन स्वार्थप्रति मोहित !!
ओ केलैथ विनार्थ मधेसक वीर शहीद केर सपना सेहो तिरोहित !!
जे केलैथ सामन्तबाद शासक केर चाकरी आ भक्ति !!
ओ कहैछैथ हम छि मुक्ति दाता मधेसी के देव प्रतिमुक्ति !!
फैस्गेल मधेसी जनता बहुरुपिया नेता क जालमे ................!!
अब्तरित होइया भ्रष्ट नेता नया नया रूप स:हरेक कालखंड के अन्तरालमे !!
जे छलैथ सामन्तबाद क पुजारी ,मधेस आन्दोलन के दमनकारी !!
ओ कहैय हम छि एक मधेस एक प्रदेश क निर्माण युगांतकारी !!
मधेसी क खून पसीना शोषण क रैय भरैया अपन भखारी!!
अपार धन सम्पति केर हक़दार होइतोमे मधेसी भेल भिखारी !!
फैस्गेल मधेसी जनता बहुरुपिया नेता क जाल में !!
अब्तरित होइया भ्रष्ट नेता नया नया रूप स हरेक कालखंड के अन्तरालमे !!
रचनाकार :प्रभात राय भट्ट

सोमवार, 31 जनवरी 2011

तुम स्वयम जागो @प्रभात राय भट्ट


जागो रे युवा जागो खोल अपनी आँखे !!

अस्त हुयी कालरात्रि छाया है सुनहरा सबेरा !!
अपनी आहार की खोजी में निकल पड़ी पंक्षी छोड़ के अपना डेरा !!
जागो रे युवा जागो खोल अपनी आँखे !!
जगादो गहरी नींद में सोये समाज को !!
जगादो भोग में भुक्त सरकारको !!
जगादो देश की कर्मधार नव युवाको !!
जगादो सोये हुए भावनायों को !!
और तुम स्वयं जागो ,
--बसंत ऋतू में लहराता हरियाली ,
पर मुरझाई हुयी है पेड़ पौधों की डाली !!
क्यों की गहरी नींद में सो गया माली !!
तुम्हे समाज को मुरझाने से बचाना है !!
अपने वतन के लिए कुछ करके दिखाना है !!
-----तुम युवा ही देस की कर्मधार हो !!
विकाश और परिवर्तन की मुलभुत आधार हो !!
अपने कार्यकुशलता ,आत्म्वल पर रखो भरोषा !!
मंजिल तुझे मुक्म्बल होगी ,मन में रख ये अभिलाषा !!
तू कदम पे कदम बढ़ाते जा ,हम भी तेरा साथ देंगे !!
ठोकर कही लगे तुझे तो हम अपना हाथ देंगे !!
तुम जहा भी जाओ हम कलम कापी के साथ होंगे !!
परिवर्तन की ईतिहास में तेरा भी नाम लिखेंगे !!
नयुतन ,ग्यालिलियो ,अब्राहम, सुकरात,गाँधी ,
इन महामानव के साथ तुझे भी हम विराजमान करेंगे !!

रचनाकार :-प्रभात राय भट्ट