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गुरुवार, 28 जुलाई 2011

चन्द्रमुखी@प्रभात राय भट्ट

रूप अहांक चम् चम् चम्कैय जेना चमकै गगनमें सितारा
चन्द्रमुखी  यए  मृगनयनी चानिपिटल  देह  पिक्वैनी 
अहां घोघ  नए  गिराऊ सजनी  हमरा  देखदिय
देख अहांक रूप सजनी मोन भेलै हमर आवारा
अहां घोघ तर सँ मुस्की मरैय छि चौवनी
मोहिलेली मोन सजनी अहां हमर सोरहनी


चन्द्रमुखी  यए  मृगनयनीचानिपिटल  देह  पिक्वैनी 
भेलू हम घायल अहांक नजरियाकें वाण सँ
जुनी तडपपाऊ सजनी मैर ज्याब हम प्राण सँ
सोलहो श्रींगार साजल अंग अंग अहां  के
करैय ईशारा हमरा मदमातल उमग अहां के
रंगविरंगक  फुल सँ साजल अछि आजुक सेज
रसपान कराऊ सजनी प्यास लागल अछि तेज
सोनपरी सन काया देखि मोनमे उठल हिलोर
यी सोहनगर राईत फेर नै भेटत भेल जैइय भोर

 रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट


चन्द्रमुखी  यए  मृगनयनीचानिपिटल  देह  पिक्वैनी 
अहां घोघ  नए  गिराऊ सजनी  हमरा  देखदिय
अहां घोघ  नए  गिराऊ सजनी  हमरा  देखदिय

शनिवार, 21 मई 2011

सजना हमर मनमोहना@प्रभात राय भट्ट

हे ययो दुलरुवा सजना हमर मनमोहना,
अहाँ बिनु दिन राईत हम काटैछी कहुना,
बितल अषाढ़ एलई देखू सावन के महिना,
संगीसहेली सभक आबिगेलय प्रियतम पहुना,

मिलल नजैर अहाँ संग  हमर जहिया स:,
अहाँ बिनु दिल लगैया नए हमर तहियाँ स:,
बड़ मुश्किल स: हम दिन राईत काटैछी,
सद्खैन सजना अहाँक बाट तकैत छि,

टुनिया मुनिया चुटकुनिया के भेलई वियाह,
पुनिया ललमुनिया के द्वार  एलई बराती,
मुदा हम बनल छि संगी सभक सराती,
नीन्द स: उठी उठी गबैछी हम पराती,

यी सभ देखिक मोन कटैय हमर अहुरिया,
हम कहिया बनब अहाँक घर क बहुरिया,
हे ययो दुलरुवा सजना हमर मनमोहना,
अहाँ बिनु दिन राईत हम काटैछी कहुना,

एसगर राईतमें नुका नुका श्रृंगार करैछी,
लाल लाल चुनरी ओढ़ी हम पेटार करैछी,
मोने  मोन हम सोचलौ यी बेकार करैछी,
फेर अपने हाथे श्रृंगारक उज्जार करैछी,

हम तडपैछी जेना ज़ल बिनु तडपैय मीन,
जाईगजाईग प्रात: करैछी उडीगेल आईखक निन,
सजना निरमोहिया राखु हमर स्नेहक लाज ,
जल्दी स: लक आऊ बराती संग शाज बाज , 

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट




शुक्रवार, 25 मार्च 2011

पेट किया जरैत@प्रभात राय भट्ट

जाईछी  परदेश  धनि छोइडक अपन देस,
भेजब कमाके धन रुपैया मीठमीठ सनेश,

जग केर रित सजनी आब अहाँ जानु,
जिनगीके चौबटिया पर येना नए कानु प्रभात राय भट्ट

प्रीत स जौं चलैत जिनगी त पेट किया जरैत,
अन्न विन दुनियां में लोग किया मरैत,

अहाँ विन सजनी हम जिव नए सकैत छी,
मुदा भूखे  जौ पेट जरत त प्रीतो नए सुहाय्त,

गरीव भक जन्म लेलौ अई पत्थर के संसार में,
जिनगीक नाव अटकल रहिगेल मजधार में,

हम नाव बनब अहाँ पतवार बनू,संग संग चलू,
हम नवका खोज के राही,अहाँ राय दैत चलू ,

दुःख सुख केर जीवन साथी अपन साथ दिय,
जिनगीक यात्रामें जौं लरखराई त हिमतके हाथदिय,

जीवन के कटुसत्य  सजनी आब अहाँ मानु,
जिनगी केर चौबटिया पर येना नए कानु,

लड़ दिय हमरा जिनगी स चलदिय कर्मपथ पर,
गन्तव्य स्थान जरुर मिलत चलू दुनुगोटा धर्मपथ पर,

रचनाकार:प्रभात राय भट्ट