
बाबा अहाँ सन कियो नै जग में महान
बाबा जन जन करैय अहिं केर गुणगान-२ मुखड़ा
अहिं छि दिन दुखी के दुःख हर्ता
सगरो जग केर पालन कर्ता
सृष्टि के बचेलौं करी कय विषपान
बाबा अहाँ सन कियो नै जग में महान
बाबा जन जन करैय अहिं केर गुणगान-२
भुत बैतालक अहाँ संग रहैत छि
घोरी घोरी कय अहाँ भंग पिबैत छि
भक्त के देलौं अन्न धन दान
बाबा अहाँ सन कियो नै जग में महान
बाबा जन जन करैय अहिं केर गुणगान-२
बाबा गला में पेन्हई छि सर्पक हार
बिकार वास्तु पर अहंक परम उपकार
हर जिव जगत अहिं केर संतान
बाबा अहाँ सन कियो नै जग में महान
बाबा जन जन करैय अहिं केर गुणगान-२
भोलेदानी अहाँ छि बड निराला
गला में सोभैय रुद्राक्षक माला
जटा पर चमक चमक च्म्कैय चान
बाबा अहाँ सन कियो नै जग में महान
बाबा जन जन करैय अहिं केर गुणगान-२
अहाँ करैछी बशहाबरद के सबारी
भोजन में भांग धतुर फलहारी
भष्म लगा बैसल छि समसान
बाबा अहाँ सन कियो नै जग में महान
बाबा जन जन करैय अहिं केर गुणगान-२
रचनाकार-प्रभात राय भट्ट
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