शनिवार, 17 सितंबर 2011

हम परदेशी@प्रभात राय भट्ट

हम परदेशी  परदेश में रहैतछी
की कहू कोना कोना  जिबैतछी
माए बाबूजीक बड याद आबैय
हमर सूनरी कनियाँ मोन परैय
माए केर ममता ल्या मोन हहरैय
बाबूजीक स्नेहदुलार  ल्या जी तर्सैय
गामक जिनगी मोन परैय



हम परदेशी  परदेश में रहैतछी
की कहू कोना कोना  जिबैतछी
लाल भैया कें डाटफटकार
बडकी भौजीक प्यार दुलार
हमर कनियाक मीठ मीठ बोली
पाबैन त्यौहार दशहरा होली
ई सभटा हमरा  मोन परैय

हम परदेशी  परदेश में रहैतछी
की कहू कोना कोना  जिबैतछी
बाट तकैत हेती बोहीन हाथमें लेने राखी
पुछैत हेती भैयाके आबैमे कतेक दिन बांकी
माए कहैत हेती सुनु यए दुल्हिन
भोरे भोर चनवार पैर कुचरैय कौआ
परदेश छोड़ी गाम अबैय हमर बौआ
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट


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