नव वर्षक नव नव संदेश
मिटए दुख दारिद्र कलेस
सुख समृद्धि,सुमंगल् वृद्धि
होमए रिद्धी सिद्धी श्रीगनेश
नव नव विचारक अँकुरण
होमए ज्ञान् ज्योती प्रस्फुटन
अविराम तरलता केर धारा
सब जीव जगत करि अवलम्बन
छ्ल दम्भ द्वैध होमए अवसान
बढए विद्वजन विद्वुषि कए मान
सभ्यताक ध्वजा गगन चुमए
होमए सभ्य समाजक निर्माण
रचनाकार :- प्रभात पुनम
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