शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

गजल@ प्रभात राय भट्ट

भ्रष्टाचारी सबहक बनल छै सरकार यौ
देशक राजनेता सभ बनल छै गद्दार यौ


झूठ फरेबक खेती में इ सभ अछि लागल
सचाई सं मुह मोड़ी भागल सब मकार यौ


जातपातक नाम पैर कराबैय दंगा फसाद
गरीबक बेट्टा के दैय लड़ लेल हकार यौ


सत्ता शाशन लेल करैय मात्रिभुमिक सौदा
स्वार्थलेल सौदागर नेता भSगेल लचार यौ


बेच देलक धरती गगन चैन अमन कें
नीलामी भेल स्वाभिमान बिकगेल विचार यौ
................वर्ण-१७.........................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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